ICC New Rules: क्रिकेट में एक बार फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिला है. वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल 2025 के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 8 अहम नियमों में फेरबदल कर दिया है.
ये बदलाव खेल को और भी पारदर्शी, तेज और रोमांचक बनाने के लिए किए गए हैं. टेस्ट हो या वनडे, अब क्रिकेट के हर फॉर्मेट में नई ऊर्जा और रफ्तार देखने को मिलेगी.
इन नियमों का असर खिलाड़ियों की रणनीति, टीम की प्लानिंग और मैच की दिशा तीनों पर पड़ेगा. आईए आपको बताते है क्या है ये 8 बड़े नियम…
अब टेस्ट क्रिकेट में भी फील्डिंग टीम को हर ओवर शुरू करने के लिए सिर्फ 60 सेकेंड का समय मिलेगा.
अगर कोई टीम तय समय में ओवर की शुरुआत नहीं करती तो पहली दो बार चेतावनी दी जाएगी, और तीसरी बार बल्लेबाज टीम को सीधे 5 रन दे दिए जाएंगे.
हर 80 ओवर के बाद ये चेतावनी दोबारा से रीसेट हो जाएगी. इसका मकसद टेस्ट मैचों की धीमी गति को सुधारना और दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाना है.
अब तक वनडे मैच में दोनों छोर से एक-एक नई गेंद इस्तेमाल की जाती थी, जिससे गेंद जल्दी पुरानी नहीं होती थी और स्पिन या रिवर्स स्विंग जैसे पहलुओं का असर कम हो जाता था.
लेकिन अब 35 ओवर के बाद टीम को एक ही गेंद का इस्तेमाल करने की इजाजत होगी. यह बदलाव खासकर डेथ ओवर्स में मैच का रुख पलट सकता है.
अब अगर कोई बल्लेबाज कैच आउट दिए जाने पर DRS लेता है और गेंद बल्ले को छूई नहीं होती, तो उसी DRS में अब LBW की भी जांच की जाएगी.
अगर गेंद थोड़ा सा भी स्टंप्स को छू रही है तो बल्लेबाज को आउट दिया जाएगा.
गेंद पर लार लगाना अभी भी बैन है. कई बार ऐसा होता है कि टीम जान बूझकर गेंद पर लार लगाती है जिससे बॉल बदल सके.
लेकिन अब अगर गेंद पर सलाइवा लग जाता है तो गेंद तुरंत नहीं बदली जाएगी. इसका फैसला अंपायर के हाथ में होगा.
अगर किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर ऐसा किया, तो बल्लेबाज टीम को 5 रन पेनल्टी में मिलेंगे.
अगर कोई बल्लेबाज जानबूझकर शॉर्ट रन करता पाया गया, तो रन रद्द करने के साथ-साथ फील्डिंग टीम को 5 रन बोनस के रूप में दिए जाएंगे.
इतना ही नहीं, अगली गेंद पर स्ट्राइक कौन लेगा, यह भी फील्डिंग टीम तय करेगी.
अब फील्डर को हवा में छलांग लगाकर बाउंड्री के बाहर जाकर गेंद को हवा में अंदर की तरफ धकेलकर, दोबारा अंदर आकर कैच लेना मान्य नहीं होगा.
फील्डर को गेंद पकड़ने से पहले मैदान के अंदर होना जरूरी है.
अगर गेंद नो-बॉल हो और उस पर कैच पकड़ा जाए, तो अब सिर्फ नो-बॉल का रन नहीं मिलेगा बल्कि यह भी जांचा जाएगा कि कैच वैध था या नहीं.
अगर एक ही गेंद पर रनआउट और LBW जैसी दो अपीलें हों, तो अब थर्ड अंपायर सबसे पहले यह देखेगा कि कौन सी घटना पहले हुई और उसी के अनुसार निर्णय देगा.
पिछले कुछ समय में क्रिकेट में यह देखा गया था कि टेस्ट मैचों की गति बेहद धीमी हो चुकी थी, DRS में खामियां दिख रही थीं और गेंदबाजों के लिए हालात बहुत मुश्किल हो रहे थे.
साथ ही, खेल में कई बार जानबूझकर फायदा उठाने जैसी हरकतें देखने को मिलीं, जिन पर लगाम लगाने की जरूरत थी. इसी को ध्यान में रखते हुए ये नए नियम बनाए गए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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