Vaibhav Suryavanshi Fastest Fifty: विश्व क्रिकेट के इतिहास में जब-जब सबसे आक्रामक पारियों का जिक्र होगा, तब-तब भारत के नए रन-मशीन और युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी का नाम सुनहरे अक्षरों में लिया जाएगा. श्रीलंका-ए के खिलाफ खेले जा रहे त्रिकोणीय सीरीज (ट्राई-सीरीज) के हाई-वोल्टेज फाइनल मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी ने विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए इतिहास रच दिया है. वैभव ने मैदान के चारों तरफ चौकों और छक्कों की ऐसी खौफनाक बारिश की, जिसने क्रिकेट जगत के बड़े-बड़े दिग्गजों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया.
भारत-ए की ओर से ओपनिंग करने उतरे वैभव ने 50 ओवर (लिस्ट-ए) क्रिकेट के इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक जड़कर वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. उन्होंने महज 11 गेंदों पर अपनी फिफ्टी पूरी कर ली. इस अविश्वसनीय पारी के साथ ही वैभव ने साल 2006 में श्रीलंका के कौशल्य वीरात्ने द्वारा बनाए गए 12 गेंदों पर अर्धशतक के 20 साल पुराने रिकॉर्ड को डस्टबिन में डाल दिया है.
फाइनल मुकाबले में श्रीलंका-ए के गेंदबाजों के पास वैभव सूर्यवंशी के तूफानी शॉट्स का कोई जवाब नहीं था. वैभव ने क्रीज पर कदम रखते ही कोहराम मचाना शुरू कर दिया. उन्होंने केवल 29 गेंदों का सामना करते हुए 94 रनों की गगनचुंबी पारी खेली. अपनी इस पारी के दौरान वैभव ने मैदान को छोटा साबित करते हुए 10 गगनचुंबी चौके और 8 आसमानी छक्के जड़े. यानी उन्होंने अपनी पारी के 76 रन महज 18 गेंदों में बाउंड्री (चौके-छक्कों) के जरिए ही बटोर लिए.
हालांकि, वे अपने हक के हकदार शतक से महज 6 रन दूर रह गए. श्रीलंका-ए के कप्तान सहान अरच्चिगे की एक फ्लाइटेड गेंद पर मिड-ऑफ के ऊपर से बड़ा शॉट मारने के चक्कर में गेंद बल्ले पर ठीक से नहीं आई और विजयकांत वियासकांत ने उनका कैच लपक लिया, जिससे इस ऐतिहासिक पारी का अंत हुआ.
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टॉस के समय भारतीय कप्तान तिलक वर्मा ने पिच की परिस्थितियों को भांपते हुए कहा था कि इस मैदान पर 300 के आसपास का स्कोर एक मजबूत और जिताऊ टोटल माना जाएगा. फाइनल के इस बड़े मंच के लिए भारतीय टीम प्रबंधन ने प्लेइंग-XI में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव करते हुए अशोक शर्मा को टीम में शामिल किया. भारतीय टीम तीन विशेषज्ञ तेज गेंदबाजों और तीन स्पिनरों के संतुलन के साथ मैदान पर उतरी.
कप्तान तिलक ने बताया कि चूंकि इस पूरी सीरीज में टीम ने किसी लक्ष्य का पीछा नहीं किया था, इसलिए वे पहले बल्लेबाजी कर विपक्षी टीम पर दबाव बनाना चाहते थे, जिसे वैभव सूर्यवंशी ने अपनी आतिशी पारी से पूरी तरह सच कर दिखाया.
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