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सर्दियों में इस बार भारत में सामान्य से ज़्यादा ठंड क्यों पड़ सकती है? La Nina से समझिए मौसम का मिजाज

La Niña: इस साल भारत में सामान्य से अधिक ठंड पड़ने की संभावना है. इसका मुख्य कारण ‘ला नीना’ नामक एक शक्तिशाली जलवायु घटना है. ला नीना एक ऐसा मौसम पैटर्न है, जहाँ मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान सामान्य से नीचे गिर जाता है, जिससे हवा के पैटर्न, वर्षा और सर्दियों में बदलाव आता है.

भारत के लिए, ला नीना का मतलब आमतौर पर अच्छी मानसून वर्षा होती है, जो कृषि और भूजल स्तर के लिए फायदेमंद है. हालांकि, इसका एक नकारात्मक पहलू यह है कि यह कठोर सर्दियाँ लेकर आता है.

उत्‍तर में शीतलहर और भारी बर्फबारी

उत्तरी भारत, विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में, ला नीना गंभीर शीतलहर और भारी बर्फबारी को जन्म दे सकता है. ऐसी स्थिति में परिवहन बाधित हो सकता है, फसलों को नुकसान पहुंच सकता है और कमजोर आबादी सबसे अधिक प्रभावित हो सकती है.

दिल्ली में बदलता मौसम का मिजाज

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी मौसम के बदलते पैटर्न की गवाह बन रही है. आज सुबह ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएँ चलीं, जिससे अधिकतम तापमान मौसम के औसत से आठ डिग्री नीचे दर्ज किया गया. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, आईएमडी (IMD) के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कम होने से आसमान साफ ​​होने की संभावना है, जिससे दिन थोड़े गर्म हो सकते हैं. लेकिन, ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएँ और साफ आसमान रात में ठंडक का स्तर बनाए रखेंगे. निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पालावत ने कहा कि ये ठंडी हवाएँ पहाड़ों से आ रही हैं, जहाँ हाल ही में पश्चिमी विक्षोभ के दौरान ताज़ी बर्फबारी दर्ज की गई थी.

तटीय राज्यों में चक्रवात का खतरा

मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ला नीना के प्रभाव से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों में भी अधिक चक्रवात आ सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कई शोधों से पता चलता है कि “इस साल हाल के वर्षों में सबसे मजबूत ला नीना घटनाएँ” देखने को मिलेंगी. भारतीय मौसम विभाग (IMD) और यूएस क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर दोनों के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि 2025 के अंत तक ला नीना के विकसित होने की 70% संभावना है.

जलवायु परिवर्तन से स्थिति जटिल

एक अधिकारी ने यह भी बताया कि “जलवायु परिवर्तन के कारण ला नीना अब पुराने नियमों पर काम नहीं कर रहा है.” ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते स्तर इन मौसम पैटर्नों को कम अनुमानित बना रहे हैं और कभी-कभी ये सामान्य प्रभावों को भी Overridden कर देते हैं.

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भले ही अगले साल कृषि को बेहतर मानसून से लाभ मिल सकता है, लेकिन गंभीर शीतलहर स्वास्थ्य देखभाल, खेती और दैनिक जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है. इसलिए, सभी को तैयारी करनी चाहिए. यह सर्दी सामान्य से अधिक कठिन हो सकती है.

यह भी पढ़िए: अगर सर्दियों में आंखों में होती है जलन? तो इन 5 तरीकों से करें बचाव

Vijay Ram

'भारत एक्सप्रेस' में चीफ सब एडिटर। न्‍यूज वेबसाइट पर एवरग्रीन स्‍टोरीज, क्रिएटिव/स्‍पेशल प्रजेंटेशन, हाइलाइट्स के अगुआ। संस्‍था के शुरुआती दौर से दिन-रात हर मौके पर दम-दिमाग झोंककर स्वयं को तपाया। अब तक 8,000 से ज्‍यादा पोस्ट्स पब्लिश कर चुके, 1K+ बाइलाइन हुईं। 'भारत एक्सप्रेस' के CMD एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय जी के प्रोग्राम्स (कॉन्क्लेव), और आर्टिकल्‍स को Bharatexpress.com पर प्रमुखता से कवर करते हैं। जर्नलिज्‍म में इनके 10+ वर्ष बीते। यहां से पहले एबीपी इंटरनेशनल, वनइंडिया हिंदी, राजस्‍थान पत्रिका और भास्कर ग्रुप में सेवा दे चुके। देश-विदेश, सैन्य-रणनीति, स्पेस साइंस, ऑफबीट, धर्म-अध्यात्म की खबरों में रुचि।

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