Budget 2026: फरवरी का महीना नजदीक आते ही हर घर में बस एक ही चर्चा शुरू हो जाती है- ‘बजट’. टीवी चैनलों से लेकर दफ्तर की कैंटीन तक, हर कोई बस यही कयास लगाता है कि इस बार क्या सस्ता होगा और क्या महंगा? लेकिन अक्सर बजट की भारी-भरकम शब्दावली हमें उलझा देती है. लोग ज्यादातर इनकम टैक्स की स्लैब ढूंढते हैं, जबकि बजट का एक बड़ा हिस्सा ‘अप्रत्यक्ष कर’ के रूप में हमारी रसोई और मोबाइल बिल तक पहुंचता है.
अगर आप भी बजट 2026 की बारीकियों को समझना चाहते हैं, तो सबसे पहले टैक्स के इस दोहरे खेल को समझना जरूरी है.
सरल शब्दों में कहें तो प्रत्यक्ष कर या ‘डायरेक्ट टैक्स’ वो पैसा है जो आप अपनी मेहनत की कमाई से सीधे सरकार को देते हैं. इसका बोझ आप किसी और पर नहीं डाल सकते. अगर आपने ज्यादा कमाया है, तो आपको ज्यादा टैक्स देना होगा. इसमें सबसे ऊपर आता है ‘इनकम टैक्स’, जो आपकी सैलरी या रेंट की कमाई पर लगता है.
इसके अलावा, अगर आप शेयर बाजार या प्रॉपर्टी से मुनाफा कमाते हैं, तो सरकार आपसे ‘कैपिटल गेन टैक्स’ वसूलती है. वहीं बड़ी कंपनियों के मुनाफे पर ‘कॉर्पोरेट टैक्स’ लगता है. भारत में इन सब की देखरेख ‘सीबीडीटी’ (CBDT) करता है. बजट में जब भी डायरेक्ट टैक्स में बदलाव होता है, तो उसका असर आपकी ‘टेक होम सैलरी’ या बचत पर पड़ता है.
अप्रत्यक्ष कर या ‘इनडायरेक्ट टैक्स’ बहुत ही शातिर तरीके से काम करता है. यह आपकी कमाई पर नहीं, बल्कि आपके ‘खर्च’ पर लगता है. आज के दौर में इसका सबसे बड़ा चेहरा GST है. आप बिस्किट का पैकेट खरीदें या नया फोन, आप अनजाने में सरकार को टैक्स चुका रहे होते हैं.
इसमें अमीर और गरीब का कोई फर्क नहीं होता; एक साबुन की टिकिया पर जितना टैक्स एक करोड़पति देता है, उतना ही एक मजदूर भी. जीएसटी के अलावा, विदेशों से आने वाले सामान पर लगने वाली ‘कस्टम ड्यूटी’ और पेट्रोल-तंबाकू जैसी चीजों पर लगने वाला ‘सेस’ भी इसी कैटेगरी में आता है. सरकार की तिजोरी भरने में इनडायरेक्ट टैक्स का बहुत बड़ा योगदान होता है.
ये भी पढ़ें- PF निकालने के लिए नहीं काटने होंगे दफ्तर के चक्कर! UPI से होगा पेमेंट, खुद ऑनलाइन सुधारें अपनी गलतियां
जब वित्त मंत्री बजट पेश करती हैं, तो इनडायरेक्ट टैक्स में एक छोटा सा बदलाव भी महंगाई को भड़का सकता है या राहत दे सकता है. मान लीजिए, सरकार ने मोबाइल के पार्ट्स पर कस्टम ड्यूटी घटा दी, तो अगले ही दिन से स्मार्टफोन सस्ते होने की उम्मीद जग जाती है.
वहीं, अगर सिगरेट या सोडा ड्रिंक्स पर सेस बढ़ा दिया गया, तो उनका दाम तुरंत ऊपर चला जाता है. जानकारों का मानना है कि इनडायरेक्ट टैक्स का बढ़ना गरीब तबके को ज्यादा चुभता है, क्योंकि उनकी सीमित आय का एक बड़ा हिस्सा इन टैक्सों की भेंट चढ़ जाता है.
आगामी बजट 2026 में भी सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि सरकार मिडिल क्लास को डायरेक्ट टैक्स में कितनी राहत देती है और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कस्टम ड्यूटी में क्या फेरबदल करती है. क्या जरूरी चीजों पर जीएसटी की दरें कम होंगी? या फिर लग्जरी चीजों पर टैक्स और बढ़ेगा? यह बजट तय करेगा कि आने वाले साल में आपके घर का बजट बिगड़ेगा या संभलेगा.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Iran US Talks: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए कतर की…
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और SIR…
जम्मू-कश्मीर के बडगाम स्थित यूसमर्ग इलाके में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी आतंकी…
Aaj Ka Rashifal: 30 सितंबर 2026 को कृत्तिका नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग बन…
Aaj Ka Panchang: 30 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2:55 बजे…
Aaj Ka Mesh Rashifal: मेष राशि वालों के लिए आज का दिन नए अवसर और…