रायबरेली से अखिलेश यादव की 'रथ यात्रा' के 4 बड़े मायने
Akhilesh Yadav Raebareli visit: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार (24 सितंबर) को रायबरेली पहुंच रहे हैं. कांग्रेस के इस पारंपरिक गढ़ से उनकी रथ यात्रा की शुरुआत को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं. हालांकि समाजवादी पार्टी साफ कर चुकी है कि यह यात्रा अभी प्रस्तावित चुनावी ‘PDA यात्रा’ नहीं है. पार्टी के मुताबिक, इसका मकसद उन लोगों और परिवारों से मिलना है, जो पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई से खुद को परेशान या पीड़ित महसूस कर रहे हैं.
अखिलेश यादव अपने दौरे के दौरान हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाएंगे. राहुल लोधी को पार्टी के प्रमुख ओबीसी नेताओं में गिना जाता है. अखिलेश यहां उन समाजवादी छात्रसभा के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे, जिनका 17 सितंबर को एबीवीपी कार्यकर्ताओं और बाद में पुलिस अधिकारियों के साथ विवाद हुआ था.
सपा की योजना सिर्फ रायबरेली तक सीमित नहीं है. पार्टी के मुताबिक, अखिलेश जिन-जिन जिलों में जाएंगे, वहां अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे परिवारों से मिलने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है, जो किसी प्रशासनिक या पुलिस कार्रवाई से नाराज हैं.
समाजवादी पार्टी पिछले कुछ समय से अपने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को राजनीतिक आधार के तौर पर आगे बढ़ाती रही है. अखिलेश यादव कई मौकों पर यह कहते रहे हैं कि जो व्यक्ति व्यवस्था की कार्रवाई से पीड़ित है, वह भी PDA का हिस्सा है.
इसी सोच के तहत पार्टी अब सीधे ऐसे परिवारों के बीच पहुंचने की कोशिश कर रही है. सपा का मानना है कि जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व किसी पीड़ित परिवार के घर पहुंचता है, तो इससे उस परिवार के साथ राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव बढ़ सकता है.
यही वजह है कि इस यात्रा को सिर्फ किसी एक विवाद पर प्रतिक्रिया देने के तौर पर नहीं देखा जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इसके जरिए सपा अपने सामाजिक आधार को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर सकती है.
अब सवाल है कि इस अभियान की शुरुआत रायबरेली से ही क्यों हो रही है? एक वजह हाल में समाजवादी छात्रसभा और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के बीच हुआ विवाद माना जा रहा है. लेकिन इसके अलावा जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक समीकरण भी अहम है.
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होने के बावजूद समाजवादी पार्टी ने रायबरेली जिले की चार विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी. अब पार्टी की नजर ऊंचाहार जैसी सीट पर भी बताई जा रही है. ऊंचाहार से सपा के टिकट पर तीन बार चुनाव जीत चुके डॉ. मनोज पांडेय अब बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. ऐसे में यह सीट सपा के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनी हुई है.
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) को देखते हुए सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर भी लगातार चर्चा होती रही है. ऐसे में रायबरेली जैसे हाई-प्रोफाइल जिले से यात्रा की शुरुआत का एक राजनीतिक संदेश भी निकाला जा रहा है.
ये भी पढ़ें: ‘अखिलेश वापस जाओ…!’ रायबरेली में सपा चीफ के आने से पहले क्यों छिड़ा पोस्टर वार?
सपा के नजरिए से देखें तो पार्टी अपने संगठन और जनाधार की मौजूदगी को दिखाना चाहती है. खासकर उन इलाकों में, जहां वह आने वाले चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर भविष्य में सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे (SP Congress Alliance 2027) को लेकर बातचीत होती है, तो दोनों दल अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों को आधार बनाएंगे. ऐसे में रायबरेली में सपा की सक्रियता को इसी व्यापक राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है. हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि रथ यात्रा सीधे तौर पर सीट बंटवारे के लिए दबाव बनाने का कार्यक्रम है. फिलहाल सपा इसे पीडीए तक सीमित रखना चाहती है.
-भारत एक्सप्रेस
Mirzapur brother sister suicide over ghee dispute: मिर्जापुर के अदलहाट में ज्यादा घी खाने के…
International Kullu Dussehra: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आयोजन 21 से 27…
UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसद अफजाल अंसारी के तीन शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के…
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया…
1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नेफा मोर्चे पर क्या हुआ था? थागला रिज से…
PM Modi meets Canadian Foreign Minister Anita Anand: पीएम मोदी से कनाडा की विदेश मंत्री…