इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल, प्रयागराज की दुर्दशा और प्रदेश के 42 राजकीय मेडिकल कालेजों में मूलभूत सुविधाओं की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के हलफनामे को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि उन्होंने अस्पताल की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ किसी कार्रवाई का खुलासा नहीं किया.
कोर्ट ने कल, 30 मई 2025 को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, प्रभारी अधीक्षक, डिप्टी एसआईसी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को हाजिर रहने का निर्देश दिया है. साथ ही, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को एसआरएन अस्पताल के आस-पास अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी रखने का आदेश दिया गया है. याचिका की सुनवाई 30 मई को 11.30 बजे होगी.
अस्पताल की दुर्दशा और कार्रवाई की जानकारी
कोर्ट के निर्देश पर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, सीएमओ, प्रभारी अधीक्षक और अन्य अधिकारियों ने हलफनामा दाखिल कर कार्रवाई की जानकारी दी. प्रभारी अधीक्षक आरके कमल ने बताया कि परिसर की सफाई शुरू हो गई है और जल्द ही पूरी हो जाएगी. आईसीयू, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, ट्रामा सेंटर और कार्डियोलॉजी विभाग के कुछ खराब एयरकंडीशनर चालू कर दिए गए हैं, बाकी जल्द ही चालू हो जाएंगे. ओपीडी में डॉक्टर बैठ रहे हैं और हाजिरी रजिस्टर बनाया गया है. मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की सूची भी प्रस्तुत की गई, जिसमें 50% डॉक्टर संविदा पर हैं. सीएमओ ने बताया कि शव विच्छेदन गृह की हालत में सुधार हुआ है और स्टाफ की तैनाती की गई है. अप्रैल 2025 तक का वेतन भी दिया जा चुका है.
कोर्ट में आलोचना- मेडिकल सुविधाओं की कमी
कोर्ट ने प्रमुख सचिव के हलफनामे को ‘आई वाश’ करार दिया, क्योंकि उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक कर रिपोर्ट सौंपी, जबकि उम्मीद थी कि वे अस्पताल का दौरा करेंगे. कोर्ट ने मेडिकल कॉलेज के हास्टलों की खस्ता हालत पर भी चर्चा की और कहा कि सरकार मूलभूत सुविधाएं देने में गंभीर नहीं है. 2019 में शुरू हुए चिल्ड्रन विंग का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है, और पेडियाट्रिक विभाग सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय में चल रहा है. कोर्ट ने महाकुंभ के दौरान 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ और प्रयागराज में मेडिकल सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सरकार लखनऊ के चिकित्सालयों पर ध्यान दे रही है, लेकिन धार्मिक केंद्र प्रयागराज की सुध नहीं ले रही.
प्रयागराज में एम्स की स्थापना का मुद्दा
अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि प्रयागराज में एम्स की स्थापना के लिए दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र सरकार ने हलफनामा देकर प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक की मंजूरी दी है, जिसमें 233 बेड और 7 ऑपरेशन थियेटर होंगे. कोर्ट ने कहा कि कुछ किया गया है, लेकिन अधिक की जरूरत है. मामले की सुनवाई जारी है.
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