उत्तर प्रदेश

नया साल, वही सियासत! जगदंबिका पाल का राहुल गांधी पर तंज- ‘बयान आएगा तभी पता चलेगा राहुल बाबा कहाँ हैं’

रिपोर्ट- नरेन्द्र मिश्र


नए साल 2026 का जश्न देश भर में शुरू हो चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बलिया में यह मौका सिर्फ जश्न का नहीं, बल्कि यादों और सियासी हमलों का भी गवाह बना. बलिया के गंगा बहुउद्देशीय सभागार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम के आयोजक प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री और स्थानीय विधायक दयाशंकर सिंह थे.

कविताओं के बीच सियासी बाण

सभागार में जब कार्यक्रम शुरू हुआ, तो माहौल अटल बिहारी वाजपेयी की यादों से भरा था. जगदंबिका पाल ने अपने संबोधन की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री की उन कविताओं से की, जो आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में जोश भर देती हैं. लेकिन जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, सांसद जी के सुर थोड़े तीखे हो गए और उन्होंने अपनी बातों का रुख केंद्र सरकार के विपक्षी नेता राहुल गांधी की ओर मोड़ दिया.

जगदंबिका पाल ने राहुल गांधी पर तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने मजाकिया और तीखे लहजे में कहा कि जब 31 दिसंबर की रात पूरा देश नए साल के स्वागत में केक काट रहा होगा और खुशियां मना रहा होगा, तब किसी को नहीं पता होगा कि राहुल बाबा दुनिया के किस कोने में हैं. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके बारे में तो तब पता चलेगा जब बाद में कहीं से कोई बयान सामने आएगा.

बलिया की धरती से दिल्ली तक संदेश

कार्यक्रम के दौरान जगदंबिका पाल ने यह बताने की कोशिश की कि जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेता ज़मीन पर रहकर जनता के साथ उत्सव मना रहे हैं और अपने महापुरुषों को याद कर रहे हैं, वहीं विपक्ष के बड़े नेता इस खास मौके पर देश से नदारद रहते हैं.

आयोजक मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी इस दौरान विकास कार्यों और अटल जी के विजन पर अपनी बात रखी. सभागार में मौजूद लोगों की भीड़ ने सांसद पाल के चुटीले अंदाज का खूब आनंद लिया. खासकर जब उन्होंने ‘राहुल बाबा’ की विदेश यात्राओं को लेकर सवाल उठाए, तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.

नए साल का आगाज़ और पुरानी सियासत

बलिया वैसे भी अपनी बागी तेवरों और राजनीतिक सक्रियता के लिए जाना जाता है. ऐसे में नए साल की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया कि 2026 में भी राजनीति का पारा कम होने वाला नहीं है. एक तरफ जहां लोग नए साल के संकल्प ले रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मंच से 2024 के बाद की राजनीतिक बिसात और मजबूत करने की कोशिशें साफ दिखीं.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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