बृजभूषण शरण सिंह- फाइल फोटो
Brijbhushan Sharan Singh Statement: गोंडा/विशाल सिंह: दिल्ली में चल रहे आंदोलनों को चर्चा इन दिनों देश में छाई हुई है. इसमें अभिजीत दीपके और नेहा बोरा प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं. इनके बहाने कांग्रेस ने भी अपनी सियासी रोटी जमकर सेकनी शरू कर दी है. इसे को लेकर बीजेपी नेता और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कांग्रेस को निशाने पर लिया है. उन्होंने तो उसके नाश तक की बात कही है.
नेहा बोरा को कांग्रेस की कमान मिलने पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा जब नाश मनुष्य का छाता है, पहले विवेक मर जाता है. कांग्रेस का नाश होने वाला है, इसलिए आमपंथी, वामपंथी, नेहा – सेहा, आकरोच – कॉकरोच सब पहुंच गए हैं वहां. जब नाश मनुज पर छाता है पहले विवेक मर जाता है, उल्टे हरि को बांधने चला जो था साध, साधने चला. अब मोदी जी का कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा.
एक निजी कार्यक्रम में गोंडा पंहुचे पूर्व सांसद भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पंजाब वीर भूमि है, गुरुओं की भूमि है, शहादत की भूमि है. शहीद भगत सिंह, उधम सिंह, जलियांवाला बाग का अपना इतिहास है. किसानों की भूमि है. खाद्यान्न के क्षेत्र में पंजाब का सबसे बड़ा योगदान है, पूरे देश को पंजाब पर आज भी गर्व है.
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AAP को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा कि लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार ने उस वीर भूमि को नशा भूमि बनाकर रख दिया है. नशा एक बहुत बड़ा कारोबार बन गया है, हजारों में नहीं बहुत बड़े पैमाने पर सरकारी संरक्षण में कारोबार चल रहा है. भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने पंजाब को नशा मुक्त करने का संकल्प लिया है. गृहमंत्री जो संकल्प लेते हैं उसे पूरा करते हैं, वह कोई काम अधूरा नहीं छोड़ते.
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जो व्यक्ति नशे के खिलाफ जागरूकता फैला रहा था, उसकी हत्या कर दी गई, यह उसी नशे के कारोबार का परिणाम है. लेकिन गृहमंत्री का संकल्प पूरा होगा, पंजाब नशा मुक्त होगा.
दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शन और एलन मस्क, असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य लोगों द्वारा संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी के सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जो भी संविधान को मानता है, न्यायपालिका को मानता है, वह इसकी निंदा करेगा.
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा या किसान के लिए नहीं है. इसका मकसद भारत को अस्थिर करना और भारत की अर्थव्यवस्था को डगमगाना है. यह आंदोलन वाले जानबूझकर छुट्टी के दिन ही कनॉट प्लेस में मार्च करते हैं, क्योंकि छुट्टी के दिन ज्यादा लोग खरीदारी करने आते हैं. इससे अर्थव्यवस्था डिस्टर्ब होती है.
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बृजभूषण ने कहा कि हमने इमरजेंसी देखी है, जेपी आंदोलन देखा है. लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी किसी ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ मार्च नहीं किया था. लेकिन आज विपक्षी लोग और कुछ ताकतें सुप्रीम कोर्ट, संवैधानिक संस्थाओं पर ही सवाल उठाकर देश को अस्थिर करना चाहती हैं. इसमें विदेशी हाथ है.
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