उत्तर प्रदेश

बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, कैंसर से थे पीड़ित

Umashankar Singh: उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम निधन हो गया. वे लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे. बसपा में उमाशंकर सिंह के कद का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि मायावती उन्हें भाई मानती थीं और रक्षाबंधन पर उन्हें जरूर राखी बांधती थीं. उमाशंकर सिंह बलिया के रसड़ा से चुनाव जीतकर विधायक बनते आ रहे थे.

बसपा विधायक उमाशंकर सिंह की गिनती एक साफ छवि वाले नेता के रूप में होती थी. यह उनकी लोकप्रियता ही थी कि साल 2011 से वो लगातार विधायक बनते आ रहे थे.

उमाशंकर सिंह की पैठ भाजपा के अंदर तक थी. वे भाजपा सरकार के करीबी भी थे. बसपा विधायक उमाशंकर और राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह आपस में रिश्तेदार भी हैं. दिनेश प्रताप सिंह की बेटी की शादी उमाशंकर के बेटे से हुई है.

बहुत बड़े कारोबारी थे उमाशंकर सिंह

बड़े कारोबारी के रूप में अपना रसूख रखने वाले उमाशंकर ने अपनी राजनीति की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी. वो साल 1990 में बलिया के एएसी कॉलेज में हुए छात्रसंघ चुनाव में महामंत्री पद पर निर्वाचित हुए थे. इसके बाद साल 2000 में वो बलिया जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए.

इसके बाद साल 2011 में उन्होंने बसपा ज्वाइन कर लिया. साल 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने पहली बार रसड़ा से जीत दर्ज की थी. उस चुनाव में जहां बसपा की 80 सीटें आई, वहीं उमाशंकर सिंह ने 84 हजार से ज्यादा वोट हासिल किये. उन्होंने सपा उम्मीदवार सनातन पांडेय को 52 हजार वोटों से हराया था.

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साल 2017 और साल 2022 के विधानसभा चुनावों में भी उमाशंकर सिंह ने जीत दर्ज की. साल 2022 में तो बसपा सिर्फ एक सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई थी और वो सीट थी रसड़ा.

2017 में अयोग्य हुए थे घोषित

उमाशंकर सिंह को साल 2017 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल राम नाइक ने अयोग्य घोषित कर दिया था. उनपर सरकारी ठेके अपने नाम पर लेने का आरोप लगा था, जांच में ये आरोप सही पाये गए थे.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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