उत्तर प्रदेश के तराई अंचल में मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक पहल की गई है. पीलीभीत टाइगर रिजर्व के मुस्तफाबाद में ‘Environment Warriors’ द्वारा श्री माँ पीताम्बरा बगलामुखी सिद्धि पीठ उत्तराखंड ट्रस्ट के सहयोग से 10वां वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे लखनऊ के सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जंगलों और बाघों की सुरक्षा में अग्रिम मोर्चे पर तैनात 140 ‘बाघ मित्रों’, वनकर्मियों, सफारी गाइड्स और ड्राइवर्स को सम्मानित किया.
इस अवसर पर पूरनपुर विधायक बाबूराम पासवान, पीलीभीत के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) मनीष सिंह (IFS), 5 बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता प्रख्यात वाइल्डलाइफ फिल्ममेकर सुब्बैया नल्लामुथु, ‘Environment Warriors’ के संस्थापक व अंबालिका ग्रुप के चेयरमैन अंबिका मिश्रा तथा रेंजर शैलेंद्र कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे.
जमीनी स्तर पर जान जोखिम में डालकर काम करने वाले बाघ मित्रों के सामाजिक और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कई कल्याणकारी घोषणाएं कीं:
बीमा शिविर: अक्टूबर 2026 में ‘वाइल्डलाइफ वीक’ के दौरान विशेष कैंप लगाकर पात्र बाघ मित्रों को ₹5 लाख का जीवन बीमा और ₹2 लाख का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा.
उत्कृष्टता सम्मान: अगले वर्ष बाघ संरक्षण में सर्वश्रेष्ठ योगदान देने वाले पांच बाघ मित्रों को ₹25,000-₹25,000 की नकद सम्मान राशि दी जाएगी.
रोजगार व सुरक्षा किट: बाघ मित्रों के बायोडाटा लेकर उन्हें योग्यता अनुसार रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा. इसके साथ ही वनकर्मियों को 50 रेनकोट, 10 मेडिकल/फर्स्ट-एड किट और बाघ मित्रों को टॉर्च व साड़ियां वितरित की गईं. असमय मृत्यु की स्थिति में पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिया गया.
वित्तीय पैरवी: डॉ. सिंह ने वन्यजीव संरक्षण और हितधारकों के कल्याण के लिए शासन को भेजे गए ₹10 लाख के प्रस्ताव की त्वरित पैरवी कर उसे स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया.
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वाइल्डलाइफ फिल्ममेकर सुब्बैया नल्लामुथु द्वारा पीलीभीत और तराई के जंगलों पर बनने वाली अंतरराष्ट्रीय फिल्म की घोषणा रही. रणथंभौर की विश्वप्रसिद्ध बाघिन ‘मछली’ पर डॉक्यूमेंट्री बनाकर वैश्विक ख्याति बटोरने वाले पांच बार के नेशनल अवॉर्ड विजेता नल्लामुथु को इस प्रोजेक्ट की अनुमति मिल चुकी है.
यह फिल्म पीलीभीत के बाघों, तेंदुओं, घास के मैदानों और स्थानीय समुदाय के संघर्ष व सह-अस्तित्व की अनूठी गाथा को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करेगी, जिससे क्षेत्र में जिम्मेदार वाइल्डलाइफ टूरिज्म और ग्रामीण रोजगार (होमस्टे, हैंडीक्राफ्ट) को भारी बढ़ावा मिलेगा.
पीलीभीत के डीएफओ मनीष सिंह (IFS) ने मंच से घोषणा की कि जिले में जल्द ही एक अत्याधुनिक लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर (Leopard Rescue Centre) का शुभारंभ किया जाएगा. यह केंद्र तेंदुओं के त्वरित रेस्क्यू, वैज्ञानिक उपचार और पुनर्वास की क्षमता को बढ़ाकर मानव-वन्यजीव संघर्ष को न्यूनतम करने में मददगार साबित होगा.
विधायक बाबूराम पासवान ने भी पीलीभीत को देश के शीर्ष टाइगर रिजर्व्स में स्थापित करने के सामूहिक संकल्प को दोहराया.
संबोधन के अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रेरक विचार रखते हुए कहा:
“बाघ मित्र और वनकर्मी जंगलों की सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी हैं. बाघों की रक्षा का सीधा अर्थ उन इंसानों की रक्षा करना है जो अपनी जान हथेली पर रखकर खड़े रहते हैं. जब बाघ बचेंगे, तभी जंगल बचेंगे और जब जंगल बचेंगे, तभी मानव सभ्यता और आने वाली पीढ़ियों का अस्तित्व सुरक्षित रहेगा.”
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