उत्तर प्रदेश

मैं सिर्फ भगवान से डरता हूं…,मुजफ्फरनगर में दहेज हत्यारे को फांसी सुनाते हुए बोले जज रवि कुमार दिवाकर

Judge Ravi Kumar Diwakar: पिछले 5 महीनों के अंदर 23 लोगों को फांसी की सजा सुनाने वाले जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने सोमवार को एक सजा सुनाने के दौरान कड़ी टिप्पणी की. अपने फैसले में उन्होंने लिखा कि मैं सिर्फ भगवान से डरता हूं और किसी से नहीं. जज रवि कुमार के इस फैसले की अब हर जगह चर्चा हो रही है.

जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि उन्हें बचपन से यही शिक्षा मिली है कि भगवान से डरना चाहिए, किसी व्यक्ति से नहीं. उन्होंने लिखा कि अगर कोई जज माफिया, बाहुबलियों या अपराधियों से डरने लगे तो जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि डरकर फैसला देने से बेहतर है कि वह पद छोड़ दें.

कानून की नजर में सभी बराबर हैं

फैसले में जज ने यह भी कहा कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं. माफिया, अपराधी और आम आदमी के लिए अलग-अलग कानून नहीं हो सकते. न्याय तभी संभव है, जब सभी के साथ समान व्यवहार हो.

दरअसल यह मामला मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र का है. साल 2018 में एक महिला की कथित तौर पर दहेज के लिए हत्या कर दी गई थी. आरोप था कि पति नदीम ने उसे प्रताड़ित किया और आग लगा दी. इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई थी.

जज ने 23 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा

पुलिस जांच और अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर 7 सितंबर 2026 को अदालत ने नदीम को हत्या और गाली-गलौज से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया. कोर्ट ने उसे फांसी की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना लगाया.

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सरकारी वकील कुलदीप कुमार के मुताबिक, जज रवि कुमार दिवाकर ने पिछले कुछ महीनों में 11 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है. उनके फैसले और उसमें की गई बेबाक टिप्पणी अब चर्चा का विषय बने हुए हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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