उत्तर प्रदेश

गरीब ठिठुर रहे, अफसर कंबल चुरा रहे? वकीलों ने खोला ‘काला चिट्ठा’; लखीमपुर का वीडियो वायरल

Lakhimpur Kheri Kambal Chori: हर्ष गुप्ता/लखीमपुर खीरी(पलिया): उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और सरकार गरीबों को राहत देने के लिए कंबल भेज रही है. लेकिन लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील में इन कंबलों को लेकर एक शर्मनाक ‘खेल’ सामने आया है, जिसने प्रशासन की ईमानदारी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. आरोप है कि जब गरीब ठंड से ठिठुर रहे थे तब तहसील के कुछ जिम्मेदार अधिकारी कंबलों की खेप को रातों-रात गायब करने की फिराक में थे. इस ‘कंबल कांड’ का पर्दाफाश तब हुआ जब बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप मुनरो ने मौके पर पहुंचकर गाड़ी पकड़ ली.

5 गांठ कंबलों का रहस्य (Lakhimpur Kheri Viral Video Kambal Chori)

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है. वीडियो में बार अध्यक्ष प्रदीप मुनरो 5 गांठ कंबलों को पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं. वकीलों का दावा है कि ये कंबल सरकारी रजिस्टर में दर्ज नहीं किए गए थे, ताकि इन्हें आसानी से ब्लैक मार्केट में बेचा जा सके या अपने चहेतों को बांटा जा सके. इस पूरे मामले में शक की सुई विवादित लेखपाल रजनीश पर घूम रही है. बताया जा रहा है कि रजनीश का तबादला जिले के दूसरे छोर से एक बड़े अधिकारी की विशेष सिफारिश पर पलिया में कराया गया था, जो अब सवालों के घेरे में है.

आमने-सामने वकील और अफसर (Corruption in Lakhimpur Kheri)

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप मुनरो ने प्रशासन को खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि सच्चाई कैमरे में कैद है. एसडीएम साहब कंबलों को ले जाने का जो वक्त बता रहे हैं, वह झूठ है. वीडियो की टाइमिंग और सरकारी रजिस्टर की खाली एंट्री सब बयां कर रही है.” उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दोषी लेखपाल पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वकील बड़ा आंदोलन करेंगे और तहसील का घेराव करेंगे.

प्रशासन का पलटवार (Lakhimpur Kheri Blanket Distribution Controversy)

दूसरी ओर पलिया के उप जिलाधिकारी (SDM) डॉ. अवनीश कुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो भ्रामक है और कंबलों को नियमानुसार ले जाया जा रहा था. एसडीएम ने उल्टा वकीलों पर ही सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि कि सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.

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अब यह मामला ‘रसूख बनाम सच’ की लड़ाई बन गया है. एक तरफ लेखपाल का रसूख और प्रशासन का डंडा है, तो दूसरी तरफ वकीलों के हाथ में सबूत. सवाल यह है कि क्या इस कड़कड़ाती ठंड में गरीबों के हिस्से के कंबल उन्हें मिल पाएंगे या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगे?

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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