Lakhimpur Kheri Kambal Chori: हर्ष गुप्ता/लखीमपुर खीरी(पलिया): उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है और सरकार गरीबों को राहत देने के लिए कंबल भेज रही है. लेकिन लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील में इन कंबलों को लेकर एक शर्मनाक ‘खेल’ सामने आया है, जिसने प्रशासन की ईमानदारी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. आरोप है कि जब गरीब ठंड से ठिठुर रहे थे तब तहसील के कुछ जिम्मेदार अधिकारी कंबलों की खेप को रातों-रात गायब करने की फिराक में थे. इस ‘कंबल कांड’ का पर्दाफाश तब हुआ जब बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप मुनरो ने मौके पर पहुंचकर गाड़ी पकड़ ली.
5 गांठ कंबलों का रहस्य (Lakhimpur Kheri Viral Video Kambal Chori)
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है. वीडियो में बार अध्यक्ष प्रदीप मुनरो 5 गांठ कंबलों को पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं. वकीलों का दावा है कि ये कंबल सरकारी रजिस्टर में दर्ज नहीं किए गए थे, ताकि इन्हें आसानी से ब्लैक मार्केट में बेचा जा सके या अपने चहेतों को बांटा जा सके. इस पूरे मामले में शक की सुई विवादित लेखपाल रजनीश पर घूम रही है. बताया जा रहा है कि रजनीश का तबादला जिले के दूसरे छोर से एक बड़े अधिकारी की विशेष सिफारिश पर पलिया में कराया गया था, जो अब सवालों के घेरे में है.
Another Feather in the cap of Avanish Kumar.
पलिया SDM अवनीश कुमार और उनके फेवरेट पलिया सदर लेखपाल रजनीश कुमार पर कंबल चोरी के गंभीर आरोप लगे हैं. पलिया तहसील से देर रात 125 सरकारी कंबल लदे एक ई रिक्शे को पकड़ा गया है. 1/2@CMOfficeUP @myogiadityanath @DmKheri @DurgaShaktiIAS https://t.co/rdpOd3L5nN pic.twitter.com/buuPe3zzNo
— Dr. Vikrant Dubey (@BlackEagleUP) January 16, 2026
आमने-सामने वकील और अफसर (Corruption in Lakhimpur Kheri)
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप मुनरो ने प्रशासन को खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि सच्चाई कैमरे में कैद है. एसडीएम साहब कंबलों को ले जाने का जो वक्त बता रहे हैं, वह झूठ है. वीडियो की टाइमिंग और सरकारी रजिस्टर की खाली एंट्री सब बयां कर रही है.” उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दोषी लेखपाल पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वकील बड़ा आंदोलन करेंगे और तहसील का घेराव करेंगे.
प्रशासन का पलटवार (Lakhimpur Kheri Blanket Distribution Controversy)
दूसरी ओर पलिया के उप जिलाधिकारी (SDM) डॉ. अवनीश कुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो भ्रामक है और कंबलों को नियमानुसार ले जाया जा रहा था. एसडीएम ने उल्टा वकीलों पर ही सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगाया है. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि कि सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.
ये भी पढ़ें: राणा बलाचौरिया मर्डर केस: कबड्डी प्रमोटर का बहाया था खून, अब सड़क पर ढेर हुआ शूटर; क्या है यूरोप कनेक्शन?
अब यह मामला ‘रसूख बनाम सच’ की लड़ाई बन गया है. एक तरफ लेखपाल का रसूख और प्रशासन का डंडा है, तो दूसरी तरफ वकीलों के हाथ में सबूत. सवाल यह है कि क्या इस कड़कड़ाती ठंड में गरीबों के हिस्से के कंबल उन्हें मिल पाएंगे या भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगे?
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


