UP News: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. मोनाड यूनिवर्सिटी फर्जी डिग्री बनाने और बेचने के गंभीर आरोपों में घिर गई है. शनिवार को यूपी एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की लखनऊ और मेरठ यूनिट की संयुक्त टीम ने विश्वविद्यालय परिसर में छापेमारी की. इस कार्रवाई में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
एसटीएफ को बीते कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि मोनाड यूनिवर्सिटी से फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट जारी की जा रही हैं. इन्हीं सूचनाओं के आधार पर शनिवार दोपहर करीब 4 बजे एसटीएफ की टीम यूनिवर्सिटी पहुंची और पूरे परिसर को चारों ओर से घेर लिया. टीम ने मौके पर मौजूद सभी लोगों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए और किसी को भी परिसर के अंदर-बाहर जाने की अनुमति नहीं दी.
करीब पांच घंटे तक चले इस ऑपरेशन में एसटीएफ ने यूनिवर्सिटी से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल डाटा जब्त किया. इनमें लैपटॉप, हार्ड डिस्क, सर्वर सिस्टम और हजारों की संख्या में फर्जी डिग्रियां शामिल हैं. इन डिजिटल सबूतों को अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि यह पता चल सके कि किस तरह और किन लोगों की मदद से यह घोटाला चल रहा था.
हिरासत में लिए गए 12 लोगों से फिलहाल पूछताछ जारी है. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होते ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. छापे के दौरान हरियाणा से गिरफ्तार किए गए दो युवकों को भी मौके पर लाया गया, जिनके पास से पहले 80 हजार फर्जी मार्कशीट मिली थीं. इन्हीं की निशानदेही पर यह छापा डाला गया था.
एसटीएफ प्रमुख अमिताभ यश ने बताया कि यूनिवर्सिटी के चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा पहले भी बड़े घोटालों में शामिल रह चुका है. वह कुख्यात ‘बाइक बोट घोटाले’ का भी मास्टरमाइंड रह चुका है, जिसमें करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी हुई थी. उस समय भी विजेंद्र सिंह पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था. पुलिस से बचने के लिए वह लंदन फरार हो गया था, लेकिन 2022 में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भारत लौटकर फिर से फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया.
छापेमारी के दौरान एसटीएफ को 1500 से ज्यादा फर्जी डिग्रियां मिलीं, जो कि 50,000 से लेकर 5 लाख रुपये तक में बेची जा रही थीं. ये डिग्रियां LLB, B.Pharma, D.Pharma, B.Tech सहित कई पेशेवर कोर्सेस की थीं, जिनका उपयोग लोग नौकरियों और अन्य शैक्षणिक लाभों के लिए कर रहे थे.
रैकेट का खुलासा ऐसे हुआ
एसटीएफ को इस रैकेट के बारे में एक लिखित शिकायत मिली थी, जिसके बाद मेरठ यूनिट ने इसकी जांच शुरू की. लगातार निगरानी और सूत्रों से मिली जानकारियों के आधार पर मोनाड यूनिवर्सिटी पर छापा मारा गया और पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया.
एसटीएफ की टीम अब यूनिवर्सिटी से बरामद डिजिटल डेटा और दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है. टीम यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले दो सालों में कितनी फर्जी डिग्रियां जारी की गईं, इन्हें किसने खरीदा और उनका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया.
यह घोटाला न केवल शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह कुछ लोग शिक्षा को व्यापार बनाकर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. आने वाले दिनों में इस मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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