Noida labor Protest: सोमवार की आधी रात जब उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढ़ाने के आदेश पर मुहर लगाई, तो लगा कि नोएडा की सड़कों पर सुलग रही आग अब शांत हो जाएगी. लेकिन मंगलवार की सुबह एक नई और खौफनाक तस्वीर लेकर आई. नोएडा के इंडस्ट्रियल इलाकों में एक बार फिर से पत्थर बरसने लगे और गाड़ियों के शीशे टूटने लगे. सवाल यह नहीं है कि सरकार ने क्या दिया, बल्कि अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वेतन बढ़ने के बाद भी मजदूरों का गुस्सा क्यों नहीं थमा?
वेतन वृद्धि के फैसले के बावजूद मंगलवार सुबह सेक्टर-121 में हालात फिर से बेकाबू हो गए. प्रदर्शनकारी मजदूरों ने अचानक पुलिस बल पर भारी पथराव कर दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. उपद्रवियों ने कई बसों और निजी वाहनों के शीशे तोड़ डाले. इसी तरह सेक्टर-80 और सेक्टर-70 में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधा आमना-सामना हुआ. पुलिस को स्थिति नियंत्रण में लाने और पत्थरबाजों को खदेड़ने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. एहतियातन पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है.
सरकार ने सोमवार रात फैसला लेते हुए नोएडा और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया. अल्प कुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये तय किए गए. यह दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी गई हैं. बावजूद इसके, मजदूर फिर से धरने पर हैं.
दरअसल, उनकी मुख्य मांग हरियाणा मॉडल लागू करने की है. हरियाणा में न्यूनतम वेतन करीब 19,000 रुपये है. मजदूर यूपी में भी 18 से 20 हजार रुपये वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, बोनस और हरियाणा जैसी सुविधाओं की मांग पर अड़े हुए हैं. उन्हें सरकार द्वारा की गई 13 हजार वाली यह बढ़ोतरी नाकाफी लग रही है.
मंगलवार को सेक्टर-63 स्थित एक फैक्ट्री के बाहर मजदूरों का भारी हुजूम इकट्ठा हो गया. विवाद की वजह प्रबंधन द्वारा 15 तारीख तक छुट्टी का नोटिस लगाना था. मजदूरों को डर था कि अगर वे ‘पंचिंग’ (हाजिरी) नहीं करेंगे, तो उनका वेतन काट लिया जाएगा. पुलिस और पीएसी ने मौके पर पहुंचकर उन्हें समझाया और घर भेजा.
इस पूरे घटनाक्रम पर फैक्ट्री मैनेजमेंट ने एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है. मैनेजमेंट का आरोप है कि यह हंगामा कोई आम विरोध नहीं, बल्कि एक ‘प्लान’ के तहत कराया जा रहा है जिसमें ‘टूलकिट’ का इस्तेमाल हो रहा है और बाहरी तत्व इस आग में घी डालने का काम कर रहे हैं.
लगातार हो रही हिंसा को देखते हुए नोएडा पुलिस ने सेक्टर-6 सहित कई संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि सरकार मजदूरों के साथ है, लेकिन उन्हें किसी के उकसावे में नहीं आना चाहिए. इस विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है (जिसमें उद्योग विभाग, मजदूर संगठन और उद्योग संघ शामिल हैं), जो हिंसा के कारणों की जांच करेगी और दोनों पक्षों के बीच सुलह का रास्ता तलाशेगी.
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