उत्तर प्रदेश

’86 में से 56 SDM… अखिलेश राज में किसको मिला सम्मान सब जानते हैं’, बलिया में जमकर बरसे ओपी राजभर

रिपोर्ट-नरेन्द्र मिश्र


उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर कैबिनेट मंत्री और सुभासपा (SBSP) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में नजर आए. बलिया के फेफना विधानसभा स्थित करनई गांव में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे राजभर ने ना केवल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया, बल्कि उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) के पद को लेकर भी एक ऐसी बात कह दी जो अब चर्चा का विषय बन गई है.

‘अखिलेश राज में ब्राह्मणों को कितना सम्मान मिला, सब जानते हैं’

जब राजभर से पूछा गया कि क्या सपा में ब्राह्मणों को सम्मान मिल पाएगा, तो उन्होंने पलटवार करते हुए सीधे अखिलेश यादव के पुराने कार्यकाल पर सवाल उठा दिए. राजभर ने तंज कसते हुए कहा, “जब अखिलेश जी मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने कितनी भर्तियों में ब्राह्मणों को जगह दी? लेखपाल, पुलिस और ग्राम सेवक की भर्तियों का रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए. 86 में से 56 SDM तो एक ही खास बिरादरी (यादव) के बनाए गए थे, क्या तब उन्हें ब्राह्मणों के सम्मान की याद नहीं आई?”

उन्होंने कहा कि विपक्ष को साल 2047 तक सिर्फ इंतजार करना चाहिए क्योंकि तब तक सत्ता में उनकी वापसी की कोई गुंजाइश नहीं है.

मनरेगा का नाम बदलने पर दिया तर्क

कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए राजभर ने उनकी पदयात्राओं को बेअसर बताया. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार के 38 जिलों में पदयात्रा निकालने के बाद भी कांग्रेस के हाथ सिर्फ 6 सीटें लगीं, यही हाल आगे भी रहने वाला है.

मनरेगा का नाम बदलने के विवाद पर राजभर ने बड़ा ही घरेलू उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, “जब कपड़े पुराने और बेकार हो जाते हैं, तो इंसान नए कपड़े पहनता है. बदलाव की जरूरत समय के साथ पड़ती है. अब मनरेगा में काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं और हफ़्तों तक रुकने वाला भुगतान अब सात दिनों में हो रहा है. अगर इसमें राम का नाम जुड़ गया है, तो इसमें बुराई क्या है? महात्मा गांधी तो राष्ट्रपिता हैं ही, उन्हें कोई नजरअंदाज नहीं कर रहा.”

उपमुख्यमंत्री पद को संवैधानिक बनाने की मांग

एक महत्वपूर्ण सवाल पर राजभर ने तर्क दिया कि अब समय आ गया है जब उपमुख्यमंत्री के पद को ‘संवैधानिक’ घोषित कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जनता की उम्मीदें बढ़ रही हैं, लोग अब जागरूक और शिक्षित हो चुके हैं. राजनीतिक चेतना बढ़ने के कारण इस पद की अहमियत बढ़ी है, इसलिए इसे संवैधानिक दर्जा मिलना जरूरी है.

घोसी उपचुनाव और ब्राह्मण विधायकों की बैठक

घोसी उपचुनाव में सुभासपा की दावेदारी पर उन्होंने गेंद पाले में डालते हुए कहा कि NDA गठबंधन जो तय करेगा, वही होगा. वहीं, हाल ही में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की बैठक और भोज को लेकर मचे हंगामे को उन्होंने ‘तिल का ताड़’ बनाना करार दिया. राजभर के मुताबिक, वह सिर्फ एक व्यक्तिगत दावत थी, जिसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.

ये भी पढ़ें: बदायूं में ‘रायते’ का खौफ; जिस भैंस का दूध पिया उसकी रेबीज से मौत, ग्रामीणों के गले में अटकी जान

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

Recent Posts

सज्जाद जहीर की कहानी: रावलपिंडी षड्यंत्र, जेल से रिहाई और भारत वापसी

सज्जाद जहीर उर्दू साहित्य के प्रमुख लेखक, प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक और कम्युनिस्ट विचारक…

16 minutes ago

गश्त के दौरान ASI को लगी गोली, दरभंगा में पुलिसकर्मी पर फायरिंग से मचा हड़कंप

Bihar News: दरभंगा के सकतपुर थाना क्षेत्र में गश्त के दौरान एएसआई रणधीर कुमार को…

1 hour ago

12 महीने में 119 बच्चों को घर पहुंचाया, दिल्ली पुलिस की महिला हेड कॉन्स्टेबल चंचल बनीं मिसाल

दिल्ली पुलिस की हेड कॉन्स्टेबल चंचल ने एक साल के भीतर 119 लापता बच्चों और…

3 hours ago