Krishna Janmabhoomi, Shahi Eidgah, Allahabad High Court, representative suit, ownership dispute, case no. 17, temple vs mosque, legal battle, notice order, limitation act, worship act, Mathura land case.
Krishna Janmbhoomi: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह स्वामित्व संबंधी विवाद में सीपीसी के आदेश 1 नियम 8 के अंतर्गत प्रतिनिधि क्षमता के लिए दायर वाद संख्या के 17 के वादी का आवेदन स्वीकार कर लिया है. अब वाद संख्या 17 को प्रतिनिधि वाद माना जाएगा और पहले उसकी सुनवाई कर निर्णय लिया जाएगा.
कोर्ट ने 15 दिन में राष्ट्रीय अखबार में नोटिस प्रकाशित करने का आदेश दिया. कहा कि, वाद में रूचि लेने वाले श्रद्वालु संशोधन अर्जी दायर कर सकते हैं. कोर्ट ने ये भी कहा कि, सभी विपक्षी मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. जो अपना पक्ष रखेंगे वो दो पक्षों के बीच मुद्दे पर सुनवाई होगी.
प्रतिनिधि वाद संबंधी आदेश न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकल पीठ ने शुक्रवार को पारित किया. इस आदेश के बाद मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तस्लीमा नसीम ने दलील दी कि अन्य वादों की कार्यवाही पर रोक लगा दी जाए. अब वाद संख्या 17 में जो भी आदेश पारित किया जाए, वह अन्य वादों पर भी बाध्यकारी हो. मंदिर पक्ष में असंतोष इस बात से है कि जिन 15 सिविल वादों को समेकित कर सुनवाई की जा रही थी, उनमें से किसी को प्रतिनिधि वाद नहीं स्वीकार किया गया.
वाद संख्या सात (श्री भगवान श्रीकृष्ण लला विराजमान और चार अन्य) में अधिवक्ता, अजय प्रताप सिहं व अनिल कुमार सिंह ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण क्षत्रिय थे और हम उनके वंशज हैं. इसलिए हमारे वाद को प्रतिनिधि वाद बनाना चाहिए. वाद 13 में पक्षकार, अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह का कहना था कि वह मथुरा के निवासी और भगवान के वशंज हैं. सबसे पहले वाद दाखिल किया था. इसलिए उनके वाद को प्रतिनिधि वाद बनाया जाए.
अजय सिंह ने ऑर्डर पढ़ने के बाद इसे चैलेंज करने की बात कही. श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने वाद बिंदु तय करने पर जोर दिया. वाद संख्या तीन में कोर्ट ने यह कहते हुए कोई आदेश देने से मना कर दिया कि सर्वोच्च न्यायलय ने किसी भी प्रकार के सर्वे पर रोक लगाई है. इसमें वादी अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने आगरा स्थित जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबे उन विग्रह की जांच के लिए एडवोकेट कमीशन गठित करने की मांग की है, जिसके लिए दावा है कि इन्हें जन्मभूमि पर बने मंदिर को ध्वस्त कर वहां ले जाया गया है.
शाही ईदगाह मस्जिद को अतिक्रमण बताते हुए मंदिर पक्ष ने ज़मीन पर कब्जा पाने, जीर्णोद्धार और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए कुल 18 मुकदमे दायर किए हैं. हाई कोर्ट में 18 अक्टूबर 2023 से यह प्रकरण सुना जा रहा है. वाद संख्या 3, 10 व 17 को छोड़ शेष समेकित किए गए थे. पहली अगस्त 2024 को न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की एकलपीठ ने मस्जिद पक्ष की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था जिनमें पोषणीयता को चुनौती दी गई थी.
कोर्ट ने माना था कि स्वामित्व संबंधी मुकदमे परिसीमा अधिनियम (लिमिटेशन एक्ट) वक्फ अधिनियम और उपासना स्थल अधिनियम 1991 से वर्जित नहीं हैं. इसके बाद 23 अक्टूबर, 2024 को कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद समिति के उस आवेदन को भी खारिज कर दिया था. जिसमें स्वामित्व संबंधी सभी मुकदमों को एकीकृत करने वाले 11 जनवरी, 2024 के आदेश को वापस लेने की मांग थी. इस आदेश से एक वाद को संशोधन के बाद प्रतिनिधि वाद के रूप में सुना जायेगा. वादी श्रद्धालुओं के प्रतिनिधि होंगे. विपक्षी मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि होंगे.
– भारत एक्सप्रेस
1943 के बंगाल अकाल में लाखों लोगों ने भूख और कुपोषण के कारण अपनी जान…
Pawan Hangman on Saurabh Rajput murder convicts death sentence: मेरठ के सौरभ 'नीला ड्रम' हत्याकांड…
Jharkhand 108 ambulance workers protest Ranchi: रांची में 108 एंबुलेंस कर्मियों ने बकाया वेतन और…
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग तीर्थ ओंकारेश्वर में सिंहस्थ 2028 के तहत प्रस्तावित विकास परियोजनाओं…
उन्नाव में लखनऊ-कानपुर हाईवे पर स्कूली बच्चों से भरी एसी बस में अचानक आग लग…
दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व…