भारत में सड़क हादसे कोई नई बात नहीं हैं. रोजाना कहीं न कहीं दुर्घटनाओं की खबर सामने आती है. इनमें कई हादसे ऐसे होते हैं, जिनमें थोड़ी सी सावधानी किसी की जान बचा सकती थी. हेलमेट भी ऐसी ही एक छोटी-सी सावधानी है, लेकिन दोपहिया वाहन चलाते समय इसे नजरअंदाज करना कई बार भारी पड़ जाता है.
इसी सोच को अपनी जिंदगी का मकसद बना चुके हैं बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले राघवेंद्र कुमार. देश में उन्हें ‘हेलमेट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से पहचाना जाता है. पिछले कई वर्षों से वह लोगों को मुफ्त हेलमेट बांटने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे हैं.
राघवेंद्र ग्रेटर नोएडा के लॉयड लॉ कॉलेज में कानून की पढ़ाई कर रहे थे. साल 2014 में उनके बेहद करीबी दोस्त और रूममेट कृष्णा कुमार ठाकुर की यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में मौत हो गई.
इस हादसे की सबसे दर्दनाक बात यह थी कि कृष्णा को गंभीर चोट सिर्फ सिर पर लगी थी और उन्होंने उस समय हेलमेट नहीं पहना था. दोस्त की मौत ने राघवेंद्र को भीतर तक हिला दिया. उन्हें लगा कि अगर हेलमेट पहना होता तो शायद कहानी कुछ और हो सकती थी.
यही घटना उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई. उन्होंने तय किया कि वह लोगों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक करेंगे और कोशिश करेंगे कि किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े.
राघवेंद्र ने उसी साल अपना अभियान शुरू कर दिया. शुरुआत किसी बड़े संगठन या सरकारी मदद से नहीं हुई. उन्होंने अपनी बचत के पैसों से हेलमेट खरीदे और जरूरतमंद लोगों को बांटना शुरू किया.
धीरे-धीरे उनकी मुहिम का दायरा बढ़ता गया. वह अलग-अलग शहरों और राज्यों में जाकर लोगों से मिलते, उन्हें सड़क सुरक्षा के बारे में समझाते और मुफ्त हेलमेट देते रहे. अब तक वह 22 से ज्यादा राज्यों में 75 हजार से अधिक हेलमेट बांट चुके हैं.
उनका काम सिर्फ हेलमेट बांटने तक सीमित नहीं है. कई जगह उन्होंने हेलमेट बैंक भी शुरू किए, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग वहां से हेलमेट ले सकें.
किसी सामाजिक अभियान को इतने लंबे समय तक चलाना आसान नहीं होता. राघवेंद्र को भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस मुहिम को जारी रखने के लिए उन्होंने ग्रेटर नोएडा का अपना फ्लैट तक बेच दिया. इसके अलावा पैतृक जमीन, बचत और निवेश का पैसा भी इस काम में लगाया.
कई मौकों पर आर्थिक स्थिति मुश्किल हुई, लेकिन उन्होंने पीछे हटने के बजाय अपना अभियान जारी रखा. उनके लिए किसी इंसान की जिंदगी बचाना किसी भी संपत्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण रहा.
राघवेंद्र की मुहिम का एक और दिलचस्प पहलू ‘बुक्स फॉर हेलमेट’ अभियान है. इसके तहत छात्र अपनी पुरानी किताबें देकर मुफ्त हेलमेट ले सकते हैं.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. जमा हुई किताबों का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए किया गया. इन किताबों की मदद से कई राज्यों में छोटी-छोटी लाइब्रेरी भी बनाई गईं.
इस तरह एक ही अभियान ने दो अलग-अलग मुद्दों को जोड़ दिया सड़क पर सुरक्षा और बच्चों के लिए शिक्षा. हेलमेट के बदले किताबें जुटाना और फिर उन किताबों को जरूरतमंद छात्रों तक पहुंचाना राघवेंद्र की मुहिम को बाकी अभियानों से अलग बनाता है.
राघवेंद्र कुमार के काम को अलग-अलग जगहों पर सम्मान भी मिला है. वह ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में पहुंचकर सड़क सुरक्षा का संदेश दे चुके हैं. उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में उन्हें सड़क सुरक्षा से जुड़े अभियान के लिए ब्रांड एंबेसडर की जिम्मेदारी भी दी गई.
आज उनकी पहचान सिर्फ मुफ्त हेलमेट बांटने वाले व्यक्ति की नहीं है. वह लगातार स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक जगहों पर जाकर लोगों को समझाते हैं कि सड़क पर सावधानी किसी नियम को पूरा करने भर की बात नहीं है.
राघवेंद्र कुमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बदलाव लाने के लिए हमेशा किसी बड़े पद या बड़े संसाधन की जरूरत नहीं होती. कभी-कभी किसी एक घटना का असर इंसान को ऐसी राह पर ले जाता है, जिससे हजारों दूसरे लोगों की जिंदगी बदल सकती है.
ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की सबसे लंबे समय तक पीएम रहने पर मेलोनी को दी बधाई, बोले- यह बहुत बड़ी उपलब्धि
-भारत एक्सप्रेस
सज्जाद जहीर उर्दू साहित्य के प्रमुख लेखक, प्रगतिशील लेखक संघ के संस्थापक और कम्युनिस्ट विचारक…
UP Assembly Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अखिलेश यादव के चुनाव नहीं…
Film Notice Pankaj Jha Bharat Express podcast Arun Govil: फिल्म 'नोटिस' में 39 साल बाद…
दिल्ली पुलिस की हेड कॉन्स्टेबल चंचल ने एक साल के भीतर 119 लापता बच्चों और…
IPL 2027 ट्रेडिंग विंडो में CSK और SRH ने बड़ा सौदा किया है. लियाम लिविंगस्टन…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन पैरा गेम्स के पदक विजेता खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनके…