मिज़ोरम की राजनीति का जब भी जिक्र होता है, तो एक नाम लाल थानहॉला सबसे पहले आता है. आइजॉल के जारकावत इलाके से ताल्लुक रखने वाले इस नेता ने पूर्वोत्तर के इस राज्य की राजनीति को जो दिशा दी, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है. पांच बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे थानहॉला ने लगभग 22 साल तक मिज़ोरम की कमान संभाली और वे आज भी यहां सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं.
लेकिन उनका यह सफर आसान नहीं था. एक वक्त ऐसा भी था जब वे मुख्यधारा की राजनीति से दूर, एक अलगाववादी आंदोलन का हिस्सा बन चुके थे.
1942 में आइजॉल के पास जन्मे लाल थानहॉला ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई यहीं पूरी की. राजनीति में आने से पहले उन्होंने जिला परिषद के स्कूल इंस्पेक्टर कार्यालय और असम को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक में भी काम किया.
1960 के दशक का दौर उथल-पुथल भरा था. मिज़ोरम (जो तब असम का हिस्सा हुआ करता था) में अलगाववादी सुर तेज थे. साल 1966 में थानहॉला ‘मिज़ो नेशनल फ्रंट’ (MNF) से जुड़े और इसके विदेशी सचिव बने. इस दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया और वे सिलचर जेल में कैद रहे. हालांकि, 1967 में जेल से रिहाई के बाद उनके जीवन ने एक नया और बड़ा मोड़ लिया. उन्होंने अलगाव का रास्ता छोड़कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दामन थाम लिया, जो उनके और राज्य के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ.
1973 में वे मिज़ोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और लगभग पांच दशकों (2021 तक) तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद चुनावी राजनीति में कदम रखते हुए वे 1984 में पहली बार मिज़ोरम के मुख्यमंत्री बने.
उनके राजनीतिक जीवन का सबसे सुनहरा और नैतिक रूप से मजबूत पल 1986 में आया. उस साल भारत सरकार और MNF के बीच ऐतिहासिक ‘मिज़ोरम शांति समझौता’ हुआ. शांति बहाल करने के लिए थानहॉला ने खुद आगे बढ़कर अपना मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया, ताकि एमएनएफ नेता लालडेंगा राज्य के मुख्यमंत्री बन सकें. भारतीय राजनीतिक इतिहास में यह एक दुर्लभ और साहसिक उदाहरण था, जहां किसी नेता ने कुर्सी से ऊपर शांति और जनहित को रखा.
राज्य के पूर्ण राज्य बनने के बाद, 1989 में वे फिर से मुख्यमंत्री बने. इसके बाद 1993, 2008 और 2013 में भी वे भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटे. 2018 के चुनावों तक उनका यह सफर अनवरत जारी रहा.
लाल थानहॉला के कार्यकाल में मिज़ोरम ने कई मोर्चों पर ऐतिहासिक तरक्की की:
हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार संजय हजारीका की एक नई किताब Lal Thanhawla: The Boy from Zarkawt and the Making of Mizoram प्रकाशित हुई है, जो उनके जीवन और मिज़ोरम के इतिहास के अनछुए पहलुओं को सामने लाती है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Aaj Ka Panchang 6 october 2026: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि यानी…
6 अक्टूबर 2026 मंगलवार को इंदिरा एकादशी, आश्लेषा नक्षत्र और साध्य योग का शुभ संयोग…
Aaj Ka Rashifal Mesh Rashi: मेष राशि वालों के लिए आज का दिन करियर और…
Aaj Ka Rashifal Vrishabh Rashi: वृष राशि वालों के लिए आज पुराने प्रयासों से लाभ…
Aaj Ka Rashifal Mithun Rashi: मिथुन राशि वालों के लिए आज करियर में नए अवसर और…
Aaj Ka Rashifal Kark Rashi: कर्क राशि वालों के लिए आज गजकेसरी योग का प्रभाव…