आज की दुनिया में जहां हर तरफ तनाव और टकराव की खबरें आम हो चुकी हैं, भारत ने एक बार फिर शांति और तरक्की का मजबूत संदेश दिया है. मौका था नई दिल्ली के सप्रू हाउस में आयोजित ‘इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स’ (ICWA) की 25वीं वर्षगांठ का, जिसे ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ का दर्जा मिले हुए भी इतने ही साल पूरे हो चुके हैं. इस खास कार्यक्रम में देश के उपराष्ट्रपति और ICWA के अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन ने शिरकत की और दुनिया के सामने भारत का पक्ष खुलकर रखा है.
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में बहुत ही गहरी बात कही. उनका मानना है कि इंसानी तरक्की और वैश्विक शांति को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता. ये दोनों चीजें तभी मुमकिन हैं जब देश एक-दूसरे की परेशानियों को समझें और आपसी फायदे के लिए मिलजुलकर कदम बढ़ाएं. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आज की कूटनीति का असली मकसद सिर्फ औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि देशों के बीच दिल से अच्छे संबंध बनाना है.
ब्रिक्स समिट और भारत की कूटनीतिक जीत
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने हाल ही में हुए ब्रिक्स समिट की सफलता का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी और विदेश मंत्रालय की पूरी टीम की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया भर में देशों के बीच मतभेद गहरा रहे हैं, ऐसे माहौल में ‘नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन’ को सभी देशों की सहमति से पास करवाना एक बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की ग्लोबल इमेज पूरी तरह बदल चुकी है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनिया भर में शांति, तरक्की और खुशहाली के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद आवाज बन चुका है. हमारी पुरानी संस्कृति का मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (यानी पूरी पृथ्वी ही हमारा परिवार है) आज सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत ने इसे करके दिखाया है.
उन्होंने इसके कई बड़े उदाहरण दिए, जैसे:
- कोरोना संकट के दौरान दुनिया के कई देशों तक पहुंचाई गई ‘वैक्सीन मैत्री’.
- दुनिया के किसी भी कोने में आपदा आने पर भारत की तरफ से तुरंत मदद पहुंचाई जाना.
- पर्यावरण बचाने के लिए ‘लाइफ’ (LiFE) स्टाइल की पहल.
- इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसे बड़े ग्लोबल मंच.
डिजिटल क्रांति और गवर्नेंस में पारदर्शिता
बात चाहे यूपीआई (UPI) की हो या देश के मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की, आज भारत हर मामले में आगे है. उपराष्ट्रपति ने बहुत ही शानदार बात कही कि “एक पारदर्शी पेमेंट सिस्टम ही आगे चलकर पारदर्शी गवर्नेंस की नींव रखता है.” इसके अलावा, भारत अपनी तकनीक और संस्थागत ताकत को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भी बांट रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण तंजानिया के जांजीबार में खुला भारत के बाहर का पहला आईआईटी (IIT) कैंपस है, जो शिक्षा के क्षेत्र में हमारी बढ़ती पहुंच को दिखाता है.
अब ICWA की भूमिका और भी अहम
बदलते हुए वैश्विक हालातों में ICWA जैसी संस्थाओं की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि काउंसिल को भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’, ‘ग्लोबल साउथ’ और ‘इंडो-पैसिफिक’ नीतियों पर अपनी रिसर्च को और मजबूत करना चाहिए. इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी, अंतरिक्ष, नई तकनीकों और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे विषयों पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने युवा स्कॉलर्स को साथ जोड़ने और ‘विकसित भारत-2047’ के सपने को पूरा करने के लिए बौद्धिक रूप से तैयार होने की भी अपील की.
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