Voskhod 1 Soviet Space Mission 1964: 12 अक्टूबर 1964 को सोवियत संघ ने अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका के साथ चल रही रेस में एक और बड़ा मुकाम हासिल किया. इसी दिन बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से वोस्कोद-1 (Voskhod-1) अंतरिक्ष यान लॉन्च किया गया. यह दुनिया का पहला मल्टी-क्रू (बहु-सदस्यीय) मानव अंतरिक्ष मिशन था. इसमें तीन कॉस्मोनॉट बिना स्पेस सूट के अंतरिक्ष गए थे.
सोवियत संघ ने पहले ही 1961 में वोस्तोक यान से यूरी गागरिन को अंतरिक्ष भेजकर रेस की शुरुआत की थी. वोस्कोद-1 उसी श्रृंखला का अगला कदम था. यह वोस्तोक यान का संशोधित रूप था. मूल रूप से दो लोगों के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन राजनीतिक दबाव में तीन कॉस्मोनॉट्स को समायोजित किया गया. इससे जगह और वजन की कमी के कारण स्पेस सूट और इजेक्शन सीट हटा दी गई. क्रू ने सिर्फ ऊनी खेलकूद जैसे कपड़े पहने थे.
मिशन के कमांडर थे व्लादिमिर कोमारोव. उनके साथ वैज्ञानिक-इंजीनियर कॉन्स्टेंटिन फियोक्तितोस्तोव और चिकित्सक बोरिस येगोरोव थे. ये दोनों सिविलियन थे- पहली बार एक इंजीनियर और एक डॉक्टर अंतरिक्ष गए. मिशन की अवधि लगभग 24 घंटे 17 मिनट रही. यान ने 16 कक्षाएं पूरी कीं. अपोजी लगभग 336-408 किलोमीटर तक पहुंचा, जो उस समय का मानवयुक्त यान ऊंचाई रिकॉर्ड था.
मिशन का मुख्य उद्देश्य जैव-चिकित्सा अनुसंधान और बहु-अनुशासनात्मक टीम के साथ काम करने का अध्ययन था. येगोरोव ने क्रू के ब्लड प्रेशर, ब्रेन वेव्स, मांसपेशियों की स्थिति और वेटलेसनेस के प्रभावों की जांच की. फियोक्तितोस्तोव ने वैज्ञानिक प्रयोग किए और पृथ्वी के फोटो लिए. क्रू ने माइक्रोग्रैविटी में तरल और गैस के व्यवहार का भी अध्ययन किया.
यह उपलब्धि अमेरिका के जेमिनी कार्यक्रम (जो दो सदस्यीय मिशन के लिए तैयार हो रहा था) से पहले हासिल की गई. जेमिनी-3 मार्च 1965 में उड़ा. सोवियत संघ ने इस तरह अंतरिक्ष रेस में अस्थायी बढ़त बनाई.
मिशन को लेकर कई आरोप लगे. जगह की कमी के कारण स्पेस सूट न पहने जाने से किसी भी दबाव रिसाव की स्थिति में क्रू की मौत निश्चित थी. लॉन्च के दौरान कोई इस्केप सिस्टम भी नहीं था. इजेक्शन सीट हटाने से आपात स्थिति में बचाव का कोई रास्ता नहीं बचा. कई विशेषज्ञों ने इसे ‘स्पेस सर्कस’ कहा और आरोप लगाया कि रिकॉर्ड बनाने की होड़ में सुरक्षा से समझौता किया गया. कॉस्मोनॉट्स को फिट होने के लिए डाइट भी करनी पड़ी.
फिर भी मिशन सफल रहा. 13 अक्टूबर 1964 को यान सुरक्षित लैंड हुआ. दिलचस्प बात यह है कि मिशन के दौरान ही सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव को सत्ता से हटा दिया गया. लौटने पर क्रू का स्वागत लियोनिद ब्रेझनेव और एलेक्सी कोसिगिन ने किया.
वोस्कोद-1 ने साबित किया कि सोवियत संघ अंतरिक्ष में तेज प्रगति कर रहा था, लेकिन इसने सुरक्षा बनाम प्रतिष्ठा के सवाल भी खड़े कर दिए. यह मिशन आज भी अंतरिक्ष इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो दर्शाता है कि किस तरह राजनीतिक दबाव ने तकनीकी सीमाओं को चुनौती दी.
यह भी पढ़ें:नैनो से आसमान तक: जानिए रतन टाटा का ‘भारत के आखिरी नागरिक’ के लिए देखा गया वो सपना, जो आज भी जिंदा है
-भारत एक्सप्रेस
Dharavi Redevelopment Project: अडाणी समूह ने मुंबई के माटुंगा में धारावी पुनर्विकास परियोजना के तहत…
8 अक्टूबर 2026 को हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता राज कुमार की 100वीं जयंती है.…
INDIA Bloc Rally: वोट चोरी के आरोपों को लेकर INDIA ब्लॉक दिसंबर के पहले सप्ताह…
यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की 2027 परीक्षाओं का टाइमटेबल जारी कर दिया है.…
BJP Congress Clash Jamshedpur: जमशेदपुर में बीजेपी महिला मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान हुए कथित…
Governor Appointments India: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की…