आधुनिक भारतीय इतिहास को आम लोगों के नजरिए से समझाने वाले जाने-माने इतिहासकार प्रोफेसर सुमित सरकार का गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को दिल्ली में निधन हो गया. वे 87 वर्ष के थे. लंबे समय से उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे प्रो. सरकार ने एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर के बाद अकादमिक जगत में शोक की लहर है.
इतिहास की किताबों में अक्सर बड़े नेताओं, बड़े आंदोलनों और राजनीतिक फैसलों पर ज्यादा जोर दिया जाता है. सुमित सरकार की खासियत यह थी कि उन्होंने इतिहास के पन्नों में उन लोगों की जगह भी तलाश की, जिनकी आवाज अक्सर पीछे छूट जाती है. किसान, मजदूर, महिलाएं और आम लोग उनके इतिहास लेखन के केंद्र में रहे. इसी वजह से वे आधुनिक भारत के इतिहास के सबसे प्रभावशाली विद्वानों में गिने जाते हैं.
1939 में कोलकाता में जन्मे सुमित सरकार ऐसे परिवार से आए थे, जहां इतिहास और शिक्षा का गहरा माहौल था. उनके पिता सुशोभन चंद्र सरकार खुद प्रसिद्ध इतिहासकार थे और उनके परिवार का अकादमिक दुनिया से पुराना रिश्ता रहा. उनके मातृ पक्ष में प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् पी.सी. महालनोबिस भी थे.
उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता से इतिहास में पढ़ाई की और आगे कलकत्ता विश्वविद्यालय से एमए तथा पीएचडी की. इसके बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय और बर्दवान विश्वविद्यालय में अध्यापन किया. 1974 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय पहुंचे और करीब तीन दशक तक वहां इतिहास पढ़ाया. 2004 तक उनका जुड़ाव विश्वविद्यालय से रहा. वे ऑक्सफोर्ड के वुल्फसन कॉलेज में भी रहे और विदेश के कई विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर अकादमिक योगदान दिया.
सुमित सरकार की सबसे चर्चित किताबों में द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल, 1903-1908 शामिल है. इस किताब ने बंगाल के स्वदेशी आंदोलन को समझने के लिए एक गहरा और शोधपरक आधार दिया.
इसके बाद आई मॉडर्न इंडिया: 1885-1947 उनकी सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली कृतियों में रही. यह किताब लंबे समय तक इतिहास के छात्रों के बीच बेहद महत्वपूर्ण मानी गई. 1983 में पहली बार प्रकाशित इस पुस्तक में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को केवल कुछ बड़े नेताओं और राजनीतिक घटनाओं की कहानी मानने के बजाय सामाजिक और आर्थिक बदलावों के साथ जोड़कर देखा.
उनका जोर इस बात पर था कि भारत का इतिहास सिर्फ ऊपर से नहीं लिखा जा सकता. नीचे के स्तर पर समाज में क्या बदलाव हो रहे थे, लोग किन परिस्थितियों में आंदोलन कर रहे थे और आम भारतीय अपने तरीके से इतिहास को कैसे प्रभावित कर रहे थे—इन सवालों को उन्होंने खास महत्व दिया.
सुमित सरकार सबाल्टर्न स्टडीज समूह के शुरुआती संस्थापक सदस्यों में शामिल थे. इस विचारधारा ने इतिहास में उन वर्गों और समुदायों की भूमिका पर ध्यान खींचा, जिन्हें पारंपरिक इतिहास लेखन में अक्सर पर्याप्त जगह नहीं मिलती थी. हालांकि, बाद के वर्षों में सरकार ने इस समूह के कुछ विचारों और उसके बदलते रुझानों पर सवाल भी उठाए.
उनकी दूसरी महत्वपूर्ण किताबों में राइटिंग सोशल हिस्ट्री, बियॉन्ड नेशनलिस्ट फ्रेम्स, ए क्रिटिक ऑफ कोलोनियल इंडिया और खाकी शॉर्ट्स एंड सैफ्रन फ्लैग्स शामिल हैं. राइटिंग सोशल हिस्ट्री में उन्होंने सामाजिक इतिहास और औपनिवेशिक भारत को समझने के तरीकों पर विस्तार से लिखा.
इतिहासकार के साथ वे एक शिक्षक भी थे और उनकी असली विरासत सिर्फ उनकी किताबों तक सीमित नहीं रही. जिन छात्रों और शोधार्थियों ने उनसे पढ़ा, उनके लिए इतिहास महज तारीखों और घटनाओं को याद करने का विषय नहीं, बल्कि समाज को समझने का जरिया बना.
प्रो. सुमित सरकार के निधन के साथ भारतीय इतिहास लेखन की एक ऐसी आवाज खामोश हो गई है, जिसने अतीत को देखने के लिए सवाल पूछना सिखाया. उनकी किताबें आने वाली पीढ़ियों के लिए यह याद दिलाती रहेंगी कि इतिहास केवल सत्ता और बड़े नामों की कहानी नहीं है. उसमें उन करोड़ों लोगों की भूमिका भी होती है, जिनके संघर्षों और अनुभवों से मिलकर असल में एक देश का इतिहास बनता है.
ये भी पढ़ें: रोमिला थापर की किताब ‘वर्तमान जैसा अतीत’, जानिए इतिहास को आंख मूंदकर स्वीकार करना क्यों है खतरनाक?
-भारत एक्सप्रेस
Mirzapur brother sister suicide over ghee dispute: मिर्जापुर के अदलहाट में ज्यादा घी खाने के…
International Kullu Dussehra: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आयोजन 21 से 27…
UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसद अफजाल अंसारी के तीन शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के…
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया…
1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नेफा मोर्चे पर क्या हुआ था? थागला रिज से…
PM Modi meets Canadian Foreign Minister Anita Anand: पीएम मोदी से कनाडा की विदेश मंत्री…