Ahmedabad Plane Crash:
12 जून 2025 को अहमदाबाद में एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर प्लेन हादसे का शिकार हो गया. जिसमें प्लेन में सवार कुल 242 में से 241 यात्रियों की मौत हो गई. इस हादसे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी सवार थे. इस प्लेन में भारत के अलावा ब्रिटेन के 52 और पुर्तगाल के 6 नागरिक भी सवार थे. इस हादसे पर दुनिया भर के लोगों ने अपनी संवेदना व्यक्त की है. हम आज आपको दुनिया के उन 7 बड़े विमान हादसों के बारे में बताएंगे. जिनके बारे में सुनकर आप चौंक जाएंगे.
27 मार्च 1977 को स्पेन के लॉस रोडियोस एयरपोर्ट पर हुआ हादसा दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा प्लेन हादसा है. हुआ यूं कि 27 मार्च 1977 को स्पेन के लॉस पामास एयरपोर्ट पर बम धमाका हुआ. जिसकी वजह से दो विमानों KLM फ्लाइट 4805 और पैन एम फ्लाइट 1736 को लॉस रोडियोस एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया गया. बता दें कि, दोनों विमानों को लॉस पामास एयरपोर्ट पर ही उतरना था. जल्दबाजी और गलत सूचना की वजह से दोनों फ्लाइट्स एक ही रनवे पर आ गईं. जिसकी वजह से दोनों फ्लाइट्स में भीषण टक्कर हो गई. इस हादसे में 586 लोगों की मौत हो गई.
12 अगस्त 1985 को जपान एयरलाइंस का बोइंग 123 विमान अपने गंतव्य के लिए उड़ान भरता है, लेकिन उड़ान के कुछ देर बाद ही विमान पहाड़ी से क्रैश हो जाता है. इस हादसे में 520 लोगों की मौत हो जाती है. जांच में पता चला कि विमान का प्रेशर सिस्टम फेल हो गया था. जिसकी वजह से पायलट विमान को कंट्रोल नहीं कर पाया. इस हादसे को दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा सिंगल प्लेन क्रैश माना जात है, जिसमें इतनी मौतें हुई हो.
3 मार्च 1974 को टर्किश एयरलाइंस का विमान डीसी-10 इस्तांबुल एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरता है, लेकिन यह पेरिस के पास जंगलों में क्रैश हो गया. बताया जाता है कि उड़ान के दौरान केबिन का दरवाजा अचानक से टूट गया था. जिसकी वजह से विमान के अंदर का एयर प्रेशर बिगड़ गया और कैप्टन का विमान पर से कंट्रोल खत्म हो गया. इस हादसे में 346 लोग मारे गए. वहीं जांच में यह भी पता चला कि इस विमान के डिजाइन में गलती थी. जिसकी वजह से ये हादसा हुआ.
आज से 28 साल पहले 12 नवंबर 1996 की शाम को हरियाणा के चरखी दादरी के गांव टिकाण कलां के आसमान में भयंकर विस्फोट हुआ. विस्फोट इतना भयंकर था कि ग्रामीणों को लगा कि आसमान में दो सूरज निकल आए हैं. दरअसल टिकाण कलां गांव के आसमान में मालवाहक विमान और यात्री विमान के बीच टक्कर हो गई थी. यात्री विमान कजाकिस्तान का था जबकि मालवाहक विमान सऊदी अरब का था. इस हादसे में कुल 349 लोगों की मौत हो गई थी. हादसा इतना जबरदस्त था कि विमानों का मलबा और शव 10 किलोमीटर की परिधि में बिखरे मिले. बताया जाता है कि इस हादसे में इतने शव मिले की शव रखने के लिए चरखी दादरी का सरकारी अस्पताल परिसर भी छोटा पड़ गया.
इस हादसे में सऊदी अरब के 18, नेपाल के 9, पाकिस्तान के 3, भारत के 231, अमेरिका के 2 और एक ब्रिटिश नागरिक की जान चली गई. वहीं इस हादसे में 84 शवों की पहचान ही नहीं हो सकी.
दिल्ली से कजाकिस्तान का यात्री विमान उड़ान भरा. उसी समय सऊदी अरब का मालवाहक विमान दिल्ली में उतर रहा था. कजाकिस्तान का यात्री विमान 15 हजार फिट की ऊंचाई पर था और धीरे-धीरे अपनी ऊंचाई खोते हुए नीचे आ रहा था. नई दिल्ली एटीसी लगातार उससे अपनी 15 हजार फिट की ऊंचाई बरकरार रखने की अपील कर रहा था. लेकिन कजाकिस्तान का विमान अपने तय ऊंचाई से और नीचे चला आ रहा था. जिसके चलते सामने से आ रहे सऊदी अरब के मालवाहक विमान से उसकी टक्कर हो गई. इस हादसे में कुल 349 लोगों की मौत हो गई थी. इस हादसे को अबतक हुए सबसे बड़े हवाई हादसों में से एक गिना जाता है.
19 अगस्त 1980 को सऊदी एयरलाइंस का लॉकहीड ट्राइस्टार विमान रियाद से उड़ान भरता है. उड़ान के कुछ ही देर बाद विमान के केबिन में आग लग गई. हालांकि पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए विमान को सुरक्षित हवाई अड्डे पर उतार लिया था, लेकिन प्लेन को समय रहते खाली नहीं कराया जा सका. जिसकी वजह से इस हादसे में प्लेन के अंदर मौजूद सभी 301 यात्रियों की मौत हो गई.
आज से लगभग 9 साल पहले 29 अक्टूबर 2018 को इंडोनेशिया के जाकार्ता से एक यात्री विमान बोइंग 737 MAX 8 पांकल पिनांग शहर के लिए उड़ान भरता है. इस विमान में 189 लोग सफर कर रहे थे. उड़ान के 13 मिनट बाद ही यह विमान समुद्र में क्रैश हो जाता है. इस हादसे में प्लेन में मौजूद सभी 189 लोगों की मौत हो जाती है. बताया जाता है कि इस विमान के क्रैश होने की वजह तकनीकी खराबी थी.
एयर इंडिया की फ्लाइट 855 (बोइंग 747) 1 जनवरी 1978 को मुंबई से दुबई के लिए उड़ान भरी. उड़ान के लगभग 2 मिनट से भी कम समय में यह विमान बांद्रा के तट से लगभग 3 किलोमीटर दूर अरब सागर में क्रैश हो गया. हादसे में सभी 213 लोगों की मौत हो गई. मुंबई की ये दुर्घटना चरखी दादरी के बाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ी प्लेन दुर्घटना थी. इस विमान को कैप्टन मदन लाल कुकर उड़ा रहे थे. वहीं इस फ्लाइट का पहला अधिकारी इंदु विरमानी थी. जो भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर रह चुकी थीं.
इस हादसे की जांच करने वाली टीम ने बताया कि यह हादसा शायद पायलटों के दिशा भ्रम होने के कारण हुआ. जांच दल ने ये भी बाताया कि हादसे में उड़ानों के उपकरण विफल हो गए थे. जिसकी वजह से चालक दल ने विमान पर से अपना नियंत्रण खो दिया.
– भारत एक्सप्रेस
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