Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में आगामी 12 फरवरी को होने वाले 13वें संसदीय चुनावों की सरगर्मियों के बीच एक बड़ा राजनीतिक विस्फोट हुआ है. आंदोलन और बदलाव की मशाल लेकर उभरी ‘नेशनल सिटीजन पार्टी’ (NCP) चुनाव से पहले ही बिखरती नजर आ रही है. पार्टी के भीतर कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन करने के फैसले ने बगावत की आग भड़का दी है. इस फैसले को विचारधारा के खिलाफ और राजनीतिक रूप से ‘आत्मघाती’ बताते हुए पार्टी के 14 केंद्रीय नेताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है.
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक, चुनाव (Bangladesh General Election 2026) से पहले पार्टी के संयोजक नाहिद इस्लाम के चुनावी हलफनामे में बताई गई आय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि जुलाई 2024 के ऐतिहासिक प्रदर्शनों की उपज मानी जाने वाली यह पार्टी अब अपने ही मूल सिद्धांतों से भटक गई है.
बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, NCP (National Citizen Party Bangladesh) के एक बड़े धड़े ने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन को पार्टी की मूल विचारधारा पर हमला बताया है. नेताओं का मानना है कि यह एक राजनीतिक आत्मघाती फैसला है, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई है. इसी आक्रोश के चलते 14 केंद्रीय नेताओं ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता अब चुनावी गतिविधियों से पूरी तरह दूर हो गए हैं और सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं.
जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों ने इस गठबंधन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि जिस आंदोलन और खून-पसीने से यह पार्टी खड़ी हुई थी, आज उसी जज्बे का सौदा किया जा रहा है. पीड़ितों के परिजनों का आरोप है कि NCP अब आम लोगों और प्रदर्शनकारियों को धोखा दे रही है. सरकार ने पहले ही वादे पूरे नहीं किए, और अब विपक्ष के रूप में उभरी इस नई उम्मीद ने भी भरोसा तोड़ दिया है.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने आरोप लगाया है कि जमात के साथ जाने का फैसला लोकतांत्रिक तरीके से नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर मौजूद सिर्फ दो खास लोगों ने लिया है. इन दो नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व के बहुमत को दरकिनार कर अपनी मनमानी चलाई है. एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर वे अभी इस्तीफा देते हैं, तो उनके साथ जिलों और डिविजनल स्तर के सैकड़ों नेता एक साथ पार्टी छोड़ देंगे, जिससे पार्टी पूरी तरह खत्म हो जाएगी.
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बांग्लादेश चुनाव से ठीक एक महीने पहले NCP में मची यह रार बताती है कि सिद्धांतों और सत्ता के समीकरण में पार्टी उलझ गई है. जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठन के साथ हाथ मिलाना NCP के लिए भारी पड़ता दिख रहा है. अगर इस्तीफों का यह सिलसिला नहीं थमा, तो 12 फरवरी के चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन तो दूर, उसका वजूद बचाना भी मुश्किल हो जाएगा. यह घटनाक्रम बांग्लादेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है.
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