China Military Parade 2025: चीन की सैन्य ताकत जिस तरह तेजी से बढ़ रही है, उससे पूरी दुनिया न केवल एशिया बल्कि अमेरिका तक को चिंता में डाल दिया है. हाल ही में बीजिंग में हुई भव्य सैन्य परेड में चीन ने अपने कई एडवांस्ड हथियारों की झलक पूरी दुनिया को दिखाई है. इस परेड में चीन ने ऐसे हथियारों का प्रदर्शन किया, जिनकी क्षमता अमेरिका महाद्वीप तक पहुंचकर हमला करने की है.
दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में गिनी जाने वाली पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के पास आज कई खास हथियारों का विशाल भंडार है. अमेरिकी रक्षा विभाग की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 2025 तक चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार होंगे. इनमें से अधिकतर हथियार बैलिस्टिक मिसाइलों, परमाणु पनडुब्बियों और रणनीतिक बॉम्बर विमानों पर तैनात किए जा रहे हैं.
चीन का पूरा सैन्य ढांचा A2/AD (Anti-Access/Area Denial) रणनीति पर आधारित है, जिसका मकसद अमेरिकी नौसेना को चीन के तटों के पास आने से रोकना है. हालांकि कुल मिलाकर देखें तो अमेरिका के पास अभी भी कहीं अधिक—करीब 5000 परमाणु हथियार हैं.
3 सितंबर 2025 को आयोजित इस सैन्य परेड में चीन ने जापान पर जीत की 80वीं वर्षगांठ मनाई. परेड में 50,000 से अधिक सैनिक, टैंक, मिसाइलें, ड्रोन और यहां तक कि रोबोटिक डॉग ड्रोन तक नजर आए. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ संदेश दिया कि ‘चीन धमकियों से डरने वाला नहीं है.’
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग की मौजूदगी ने इस परेड को और खास बना दिया है. पहली बार ये तीनों नेता एक ही मंच पर दिखे, इसके अलावा ईरान और पाकिस्तान समेत कई एशियाई देशों के नेता भी मौजूद थे. पश्चिमी देशों के किसी बड़े नेता ने इसमें हिस्सा नहीं लिया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस परेड से खासे खफा नजर आए. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए व्यंग्य में लिखा ‘कृपया पुतिन और किम जोंग उन को मेरी शुभकामनाएं दें, क्योंकि आप अमेरिका के खिलाफ साजिश रच रहे हैं.’
ट्रंप का आरोप है कि यह परेड चीन-रूस-उत्तर कोरिया के गठबंधन की झलक है, जो अमेरिका को घेरने की साजिश रच रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में चीन की जीत में अमेरिका की भूमिका (जैसे लेंड-लीज सहायता) का कोई जिक्र नहीं किया गया, जबकि असलियत में चीन उस समय अमेरिकी मदद पर निर्भर था.
दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने परेड को “बेहद प्रभावशाली” बताते हुए माना कि चीन ने यह शक्ति प्रदर्शन अमेरिका को संदेश देने के लिए किया. उन्होंने यह भी जोड़ा कि शी जिनपिंग चाहते थे कि वे इसे देखें—”और हां, मैं देख रहा था.”
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच सीधा युद्ध अभी दूर की बात है. दोनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और टकराव दोनों के लिए विनाशकारी साबित होगा. हालांकि, चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और रूस-उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ उसकी नजदीकी वॉशिंगटन के लिए सिरदर्द जरूर है.
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-भारत एक्सप्रेस
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