दुनिया

संसद में खुली ट्रंप की पोल-पट्टी! ईरान जंग को लेकर कर ऐसा क्या बोल गए अमेरिकी सांसद

Donald Trump Iran War: अमेरिका में ईरान को लेकर चल रहे युद्ध पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी (Chris Murphy) ने सीनेट में ट्रंप की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. मर्फी का आरोप है कि ट्रंप पिछले कई महीनों से अमेरिकी जनता को यह भरोसा दिलाते रहे हैं कि ईरान के साथ समझौता होने वाला है और युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा, लेकिन हर बार ऐसा दावा हकीकत से दूर साबित हुआ.

मर्फी ने सवाल उठाया कि आखिर हर बार युद्ध खत्म होने की खबरें ऐसे समय पर क्यों सामने आती हैं, जब अमेरिकी शेयर बाजार खुलने वाला होता है. उनका आरोप है कि इन घोषणाओं का असर बाजार पर पड़ सकता है और इससे ट्रंप से जुड़े लोगों को आर्थिक फायदा मिलता है.

11 बार किया युद्ध खत्म होने का दावा

सीनेटर क्रिस मर्फी के मुताबिक, ट्रंप के बयानों में अब एक पैटर्न दिखाई देने लगा है. उन्होंने दावा किया कि करीब छह महीने से जारी इस संघर्ष के दौरान कम से कम 11 अलग-अलग मौकों पर राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि ईरान के साथ समझौता बस होने ही वाला है या युद्ध जल्द खत्म हो जाएगा.

मर्फी का कहना है कि इनमें से कोई भी दावा टिकाऊ समझौते में नहीं बदल पाया. उनका आरोप है कि इसके बावजूद अमेरिकी जनता को बार-बार यही संदेश दिया जाता रहा कि हालात नियंत्रण में हैं और संघर्ष अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है.

सीनेटर ने खास तौर पर रविवार रात और सोमवार सुबह के समय किए गए ट्रंप के ऐलानों का जिक्र किया. उनका कहना था कि ये घोषणाएं अक्सर बाजार खुलने से ठीक पहले आती हैं. मर्फी के मुताबिक, इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इन बयानों का बाजार पर संभावित असर पहले से ध्यान में रखा जाता है.

$1 लाख महीने वाले सब्सक्रिप्शन पर भी सवाल

मर्फी ने ट्रंप से जुड़ी एक नई सब्सक्रिप्शन व्यवस्था को लेकर भी निशाना साधा. उन्होंने दावा किया कि करीब एक हफ्ते पहले ट्रंप की ओर से ऐसी सेवा की घोषणा की गई, जिसमें 100,000 अमेरिकी डॉलर यानी करीब एक लाख डॉलर प्रति महीने भुगतान करने वालों को ट्रंप की Truth Social पोस्ट आम लोगों से पहले देखने की सुविधा मिलने की बात कही गई.

मर्फी ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया. उनका आरोप है कि अगर किसी व्यक्ति को राष्ट्रपति की पोस्ट या विदेश नीति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी बाकी लोगों से पहले मिलती है, तो वह जानकारी बाजार में आर्थिक लाभ उठाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है. सीनेटर ने इसे सीधे तौर पर संभावित ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ से जोड़ते हुए सवाल किया कि क्या कोई अमेरिकी सीनेटर युद्ध के बीच ऐसी व्यवस्था का समर्थन करेगा, जिसमें पैसे देकर राष्ट्रपति की अहम घोषणाओं तक पहले पहुंच हासिल की जा सके.

‘क्या युद्ध से भी पैसा कमाने की कोशिश हो रही है?’

मर्फी ने अपने भाषण में ट्रंप की पूरी रणनीति पर ही सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी जनता को युद्ध की वास्तविक स्थिति बताने के बजाय उन्हें लगातार यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि संघर्ष खत्म होने वाला है. उनका कहना था कि लोगों से कहा जा रहा है कि चिंता करने की जरूरत नहीं है, जबकि युद्ध लंबा खिंच रहा है, इसकी कीमत अमेरिका को चुकानी पड़ रही है और अभी भी इसका कोई स्पष्ट अंत दिखाई नहीं दे रहा.

मर्फी ने यहां तक सवाल उठाया कि क्या यह संघर्ष सिर्फ नीतिगत गलतियों या लापरवाही की वजह से जारी है, या फिर इसके पीछे आर्थिक हित भी काम कर रहे हैं. हालांकि, ये मर्फी के आरोप और सवाल हैं, किसी स्वतंत्र जांच से साबित तथ्य नहीं.


ये भी पढ़ें:‘कहीं नहीं, मैं यहीं हूं…’ गायब होने के दावे पर मोजतबा खामेनेई का जवाब, सोच में पड़े इजरायल-अमेरिका


जून के युद्धविराम को लेकर क्या कहा?

ईरान के साथ युद्धविराम को लेकर भी मर्फी ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि जून में हुए युद्धविराम से उन्हें राहत जरूर मिली थी, लेकिन उसकी शर्तों को देखते हुए उन्हें शुरुआत से ही संदेह था कि यह लंबे समय तक टिक पाएगा. मर्फी के मुताबिक, वह कोई ऐसा व्यापक और स्थायी समझौता नहीं था जो संघर्ष की जड़ को खत्म कर सके. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि बहुत से लोग किसी भी तरह के समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार दिखाई देते हैं, क्योंकि युद्ध की कीमत लगातार बढ़ रही है.

उन्होंने माना कि ईरान के साथ होने वाला कोई समझौता राजनीतिक रूप से अमेरिका के लिए असहज हो सकता है और ईरान उसे अपनी जीत के तौर पर पेश कर सकता है. लेकिन इसके बावजूद मर्फी का साफ कहना है कि लंबा खिंचता युद्ध उससे कहीं बड़ी समस्या है.

युद्ध को सच में खत्म करें ट्रंप- मर्फी

सीनेट में अपने बयान के दौरान क्रिस मर्फी ने ट्रंप से ईरान युद्ध को जल्द खत्म करने की अपील की. उनका कहना है कि अमेरिकी प्रशासन को ऐसे दावों से बचना चाहिए, जिनमें बार-बार युद्ध खत्म होने की उम्मीद दिखाई जाती है लेकिन जमीन पर कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आता.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

Recent Posts

हार की हैट्रिक के बाद धमाकेदार पलटवार…! HK6 में टीम इंडिया ने बांग्लादेश को हराकर चखा जीत का स्वाद

हॉन्गकॉन्ग इंटरनेशनल सिक्सेस 2026 के 11वें स्थान के प्लेऑफ मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को…

29 minutes ago

अर्नब चक्रवात के बाद एक और भीषण तूफान…! 20 राज्यों में मचेगा उत्पात, मूसलाधार बारिश का खौफनाक अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के चक्रवाती तूफान में बदलने की…

1 hour ago

बिहार में बड़ा सियासी बवंडर, दो निर्दलीय MLC के बीजेपी में शामिल होते ही भड़के तेजस्वी, कहा- संविधान का उड़ रहा मजाक

Tejashwi Yadav: बिहार में दो निर्दलीय विधान पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद…

1 hour ago

दिवाली से ठीक पहले महंगाई की तगड़ी खुराक…! बढ़ गए सिलेंडर के दाम, जानें क्या है नया रेट

LPG Cylinder Price Hike: तेल कंपनियों ने 1 नवंबर 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल…

1 hour ago

अहोई अष्टमी पर ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव…! अचानक इन 4 राशियों पर बरसेगा बेहिसाब पैसा

रवि पुष्य नक्षत्र और अहोई अष्टमी के संयोग में 1 नवंबर 2026 का दिन ज्योतिषीय…

2 hours ago

रवि पुष्य नक्षत्र और अहोई अष्टमी पर दुर्लभ संयोग…! भूलकर भी न करें ये बड़ी गलती, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

1 नवंबर 2026 को रवि पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रिपुष्कर योग समेत कई…

2 hours ago