दुनिया

हुकूमत की जंग, मासूमों की बलि! गाजा से यूक्रेन तक मौत का तांडव; 11.7 करोड़ लोग घर छोड़ने को मजबूर

Global Conflict Crisis: दुनिया के कई देश संघर्षों के जंजाल में फंसे हैं. हुकूमत की जंग में मानवाधिकारों को दरकिनार किया जा रहा है. मासूमों की जान जा रही है, और दिन-ब-दिन इन आंकड़ों में बढ़ोतरी चिंता का सबब बनी हुई है.

2022 से 2026 के बीच कई देश आपस में उलझे रहे. इसके कुछ आंकड़े दिल दहलाने वाले हैं. संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार यूक्रेन, गाजा, लेबनान, ईरान सहित पूरे पश्चिम एशिया में लाखों लोग मारे गए हैं और करोड़ों विस्थापन का सामना कर रहे हैं.

हाल ही में डब्ल्यूएचओ की अधिकारी ने ईरान संघर्ष का एक आंकड़ा पेश किया. ईरान संघर्ष के शुरुआती हफ्तों में ही करीब 3,300 लोग आसमान से बरसते गोलों का शिकार हुए, तो 43 लाख से ज्यादा दर-ब-दर हुए. ये रूह कंपाने वाली सच्चाई विश्व स्वास्थ्य संगठन की ईस्टर्न मेडिटेरेनियन (पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों) की क्षेत्रीय निदेशक, हनान बाल्खी, ने ईरान संघर्ष के शुरुआती हफ्तों के असर का अवलोकन करते हुए बताई.

3,300 से ज्यादा लोगों की गई जान

बाल्खी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि लड़ाई ने हाल के दशकों में सबसे “बड़े संकटों” में से एक को जन्म दिया है, जिसके नतीजे दर्दनाक हैं. 3,300 से ज्यादा लोगों की जान गई है, 30 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए और 4.3 मिलियन (43 लाख) से ज्यादा बेघर हुए हैं. इतना ही नहीं, इस दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर 116 हमले किए गए. इतना ही नहीं, कई औद्योगिक इकाइयों, आपातकालीन सेवाओं और अहम बुनियादी ढांचों को भी निशाने पर लिया गया.

ये तो हाल की बात है. डब्ल्यूएचओ की एक संस्था के अनुसार मानव समाज पर सबसे व्यापक प्रभाव रूस–यूक्रेन संघर्ष का देखा गया है, ये फरवरी 2022 में शुरू हुआ. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (ओएचसीएचआर) के अनुसार 2022 से 2024 के बीच 11,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि 20,000 से ज्यादा घायल हुए.

यूक्रेन में यूएन ह्यूमन राइट्स मॉनिटरिंग मिशन (एचआरएमएमयू) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि 2022 के बाद 2025 यूक्रेन में आम लोगों के लिए सबसे खतरनाक साल साबित हुआ था.

एचआरएमएमयू ने स्पष्ट बताया कि 2025 में, यूक्रेन में 2,514 आम लोग मारे गए और 12,142 घायल हुए. 2025 में मारे गए और घायल हुए आम लोगों की कुल संख्या 2024 (2,088 मारे गए; 9,138 घायल) की तुलना में 31 फीसदी ज्यादा थी और 2023 (1,974 मारे गए; 6,651 घायल) की तुलना में 70 फीसदी ज्यादा थी.

2025 में 60 लाख से अधिक लोग विस्थापित

2025 में भी वृद्धि दर्ज की गई. 2025 में यूएनएचसीआर के मुताबिक, 2023 तक 60 लाख से अधिक लोग देश छोड़ चुके थे, जबकि लगभग 50 लाख लोग आंतरिक (देश के भीतर) रूप से विस्थापित हुए. इस तरह यह संघर्ष एक करोड़ से अधिक लोगों के विस्थापन का कारण बना है.

मध्य पूर्व में गाजा की तस्वीर कम खौफनाक नहीं! अक्टूबर 2023 से जारी इस युद्ध में 2026 तक 75,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2024 तक गाजा की लगभग 85 से 90 प्रतिशत आबादी, यानी 18 से 19 लाख लोग, अपने घरों से विस्थापित हो चुके थे. इसे आधुनिक समय के सबसे बड़े मानवीय संकटों में गिना जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र ने 1 नवंबर 2024 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच (ओएचसीएचआर की मॉनिटरिंग और सरकारी सोर्स, दूसरी यूएन संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों से मिली जानकारी पर आधारित) की तस्वीर एक रिपोर्ट के जरिए प्रकाशित की.

गाजा में मारे गए 25,594 फिलिस्तीनी

गाजा स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस दौर में 25,594 फिलिस्तीनी मारे गए और 68,837 घायल हुए. ओएचसीएचआर ने इसकी पुष्टि भी की. यूएन ने बताया कि इजरायल पर हमास के हमलों के बाद (7 अक्टूबर 2023) से 68,800 फिलिस्तीनी मारे गए और 1,70,664 घायल हुए (नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच).

इसी क्षेत्र में इजरायल-हिज्बुल्लाह विवाद के कारण लेबनान भी गंभीर संकट से गुजर रहा है. 2023 से 2026 के बीच 2,000 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जबकि 10 से 12 लाख लोग विस्थापित हुए हैं. यूनीसेफ ने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है.

पाकिस्तान–अफगानिस्तान झड़प में 1 लाख लोग विस्थापित

दक्षिण एशिया में पाकिस्तान–अफगानिस्तान सीमा विवाद भी तनाव का केंद्र बना हुआ है. 2023 से 2026 के बीच सीमा पर झड़पों में 200 से 300 लोगों की मौत हुई है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2026 में ही लगभग एक लाख लोग विस्थापित हुए. 26 फरवरी की देर शाम से लेकर 5 मार्च 2026 तक, यूएनएएमए ने अफगानिस्तान में अप्रत्यक्ष गोलीबारी और हवाई हमलों के कारण कुल 185 नागरिक के मारे जाने की पुष्टि की.

इन मारे गए लोगों में अधिकांश (55 प्रतिशत) महिलाएं और बच्चे थे. वहीं, 27 फरवरी को पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में हवाई हमलों में 14 नागरिक (चार महिलाएं, दो लड़कियां, पांच लड़के और तीन पुरुष) मारे गए और छह अन्य (दो महिलाएं, एक लड़की, दो लड़के और एक पुरुष) घायल हो गए थे.

पाक-अफगान सीमा हुई हिंसक

यूएन रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में सीमा पार हुई सशस्त्र झड़पों में मारे गए नागरिकों की संख्या, 10-17 अक्टूबर 2025 के बीच अफगानिस्तान- पाकिस्तान के बीच हुई झड़प से कहीं ज्यादा है. यूएनएएमए ने बताया कि तब 47 नागरिक मारे गए थे और 456 घायल हुए थे.

2025 के अंतिम तीन महीनों में, यूएनएएमए ने अफगानिस्तान में 70 नागरिकों की मौत और 478 के घायल होने की जानकारी दर्ज की. इसके अतिरिक्त, 1 जनवरी से 22 फरवरी 2026 के बीच, नांगरहार प्रांत में हवाई हमलों और सीमा पार गोलाबारी में 13 नागरिकों के मारे जाने और 12 के घायल होने की जानकारी दी.

2025 में दुनिया भर में 11.7 करोड़ लोग जबरन विस्थापित

वैश्विक स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है. यूएनएचसीआर के 2024–2025 के आंकड़ों के अनुसार दुनिया भर में 117 मिलियन (11.7 करोड़) से अधिक लोग जबरन विस्थापित हैं. यह संख्या इस बात को रेखांकित करती है कि आधुनिक संघर्षों में सबसे ज्यादा कीमत आम आदमी को चुकानी पड़ रही है.

ये भी पढ़ें- RCB vs CSK: IPL 2026 में सबसे बड़ा टारगेट! 19वें ओवर में 6, 2, 4, 6, 6, 6… डेविड ने बरसाया कहर, CSK को मिला विशाल लक्ष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 के बाद के संघर्षों में एक स्पष्ट बदलाव देखा गया है—शहरी इलाकों में लड़ाई और क्षेत्रीय युद्धों के विस्तार ने मानवीय संकट को और जटिल बना दिया है. संयुक्त राष्ट्र तत्काल संघर्षविराम, मानवीय सहायता और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है लेकिन इस ओर ध्यान हुक्मरान कम ही दे रहे हैं.

(IANS के इनपुट पर आधारित)

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

Recent Posts

गोल्ड लवर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! धनतेरस से ठीक पहले सोने के भाव होंगे धड़ाम, जानें आज के ताजा दाम

रिकॉर्ड ऊंचाई से नीचे आने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में लगातार सुस्ती…

18 minutes ago

UP के 70 हजार शिक्षकों की बल्ले-बल्ले: 10 साल का इंतजार खत्म, दिवाली से पहले मिलेगा प्रमोशन का तोहफा

Diwali Gift UP Teachers: यूपी के परिषदीय स्कूलों में 2016 से अटका शिक्षकों का प्रमोशन…

38 minutes ago

“कमाल कर दिया पायलट जी…”, सलमान खान हुए भारतीय पायलट की बहादुरी के मुरीद; सोशल मीडिया पर किया खास पोस्ट

आसमान में हुए जानलेवा हमले के बीच सूझबूझ दिखाकर 174 यात्रियों की जान बचाने वाले…

1 hour ago

किसने किया कैप्टन स्मित पर हमला? नाम आया सामने… ओमान में था बैन, ऐसे बना दुबई में पायलट; जानें पूरा कच्चा-चिट्ठा

Smit Machchhar Attack: फ्लाईदुबई FZ1073 में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने वाले को-पायलट की…

1 hour ago