Imran Khan Health Update: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. रावलपिंडी की अडियाला जेल में सजा काट रहे 74 वर्षीय इमरान खान की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया. इमरान खान पिछले कुछ समय से आंखों की एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसके इलाज और फॉलो-अप के लिए उन्हें यह डे-केयर सर्जरी करवानी पड़ी है.
अस्पताल के प्रवक्ता के मुताबिक, इमरान खान की दाहिनी आंख में ‘सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ (CRVO) नाम की गंभीर बीमारी है. इसका पता इसी साल जनवरी के अंत में चला था. डॉक्टरों ने जांच के बाद उनकी हालत को स्थिर बताया और फिर ऑपरेशन थिएटर में जरूरी प्रक्रियाओं के बाद उन्हें चौथा इंट्राविट्रियल ‘एंटी-VEGF’ इंजेक्शन लगाया. इससे पहले उन्हें 24 जनवरी, 24 फरवरी और 23 मार्च को इसके इंजेक्शन दिए जा चुके हैं. डॉक्टरों की मानें तो उनकी ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (OCT) की गई, जिसमें उनकी आंखों की स्थिति में काफी सुधार देखा गया है. मंगलवार सुबह उन्हें अस्पताल से वापस जेल के लिए डिस्चार्ज कर दिया गया.
इमरान खान के अस्पताल जाने की पुष्टि पीटीआई के अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने सोशल मीडिया पर की है. हालांकि, उन्होंने सरकार के रवैये और इलाज की प्रक्रिया पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं. बैरिस्टर गोहर ने कहा, “इलाज चाहे जो भी हो, लेकिन हमारी चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं. इमरान खान (Pakistan PTI founder Imran Khan) और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को किसी ऐसे निजी अस्पताल (शिफा इंटरनेशनल) में शिफ्ट किया जाना चाहिए, जहां उनके अपने निजी डॉक्टरों और परिवार की देखरेख में इलाज हो सके.” पीटीआई का आरोप है कि सरकार इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर पारदर्शिता नहीं बरत रही है, हालांकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.
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गौरतलब है कि इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी इस समय कई मामलों में रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं. जेल अधिकारियों के मुताबिक, इससे पहले 17 अप्रैल को बुशरा बीबी की भी रावलपिंडी के ही एक अस्पताल में आंखों की सर्जरी हुई थी. फिलहाल जेल के अंदर दोनों की सेहत पर डॉक्टरों की एक विशेष टीम लगातार नजर बनाए हुए है. पीIMS के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि आमतौर पर इस बीमारी में तीन इंजेक्शन ही दिए जाते हैं, इसलिए चौथे इंजेक्शन की जरूरत पड़ना बीमारी की गंभीरता को दर्शाता है.
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