India statement in UNSC On Afghanistan airstrikes: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की ओपन डिबेट में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने अफगानिस्तान में हालिया घटनाक्रम पर भारत का स्पष्ट और सख्त रुख रखा. उन्होंने अफगानिस्तान में क्रिकेट के माध्यम से युवाओं में आए उत्साह की सराहना की, लेकिन साथ ही बॉर्डर पार से हो रहे हमलों और क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म पर गहरी चिंता जताई.
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने सेक्रेटरी जनरल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बॉर्डर पार से हथियारों से होने वाली हिंसा से आम लोगों की मौत पर गहरी चिंता है. उन्होंने कहा कि हम सेक्रेटरी जनरल की उस अपील को दोहराते हैं और उसका सपोर्ट करते हैं जिसमें इंटरनेशनल कानून के तहत जिम्मेदारियों का पालन करने और आम लोगों की सुरक्षा पक्का करने की अपील की गई है, जिसमें इंटरनेशनल मानवीय कानून भी शामिल है.
भारत अफगान इलाके पर एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा करता है, जो इंटरनेशनल कानून और UN चार्टर और देश की आजादी के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि एक तरफ इंटरनेशनल कानून और इस्लामिक एकता के ऊंचे सिद्धांतों की बात करना और दूसरी तरफ रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से एयर स्ट्राइक करना दिखावा है. 6 मार्च 2026 तक 185 बेगुनाह आम लोग मारे गए हैं, जिनमें से लगभग 55% महिलाएं और बच्चे हैं और UNAMA के अनुसार एक लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं.
पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि आज अफगानिस्तान आने वाला कोई भी विजिटर अफगान युवाओं को जोश के साथ क्रिकेट खेलते हुए देखेगा. अफगानिस्तान क्रिकेट टीम जहां भी खेली है, दिल जीतती रही है और अभी-अभी खत्म हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में उनका जोश और जुनून देखने लायक था.
मेरे देश को उनके सफर का हिस्सा बनने पर गर्व है और उन्हें अफगानिस्तान के लोगों के लिए बहुत खुशी लाते देखकर खुशी हो रही है, जो इतना कुछ झेल रहे हैं. उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों के दर्द को स्वीकार करते हुए कहा कि क्रिकेट ने वहां के युवाओं को नई उम्मीद दी है.
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पर्वतनेनी हरीश ने टेररिज्म को दुनिया भर में इंसानियत के लिए खतरा बताते हुए कहा कि टेररिज्म दुनिया भर में इंसानियत को परेशान करने वाला एक खतरा बना हुआ है. सिर्फ इंटरनेशनल कम्युनिटी की मिलकर की गई कोशिशों से ही यह पक्का हो पाएगा कि ISIL और अल कायदा और उनके साथी संगठन जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद और LeT के प्रॉक्सी जैसे द रेजिस्टेंस फ्रंट शामिल हैं, और जो लोग उनके ऑपरेशन में मदद करते हैं, वे अब क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म में शामिल न हों. भारत ने स्पष्ट किया कि टेररिज्म के खिलाफ लड़ाई में कोई समझौता नहीं होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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