दुनिया

वैश्विक समुद्री व्यापार में अमेरिका-चीन को टक्‍कर दे रहा भारत, इतिहास रचने के कगार पर हैं हमारे ये बंदरगाह

दुनियाभर के समुद्री व्यापार में भारत की ताकत तेजी से बढ़ रही है. हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का समुद्री बुनियादी ढांचा अब दुनिया के दिग्गजों को चुनौती दे रहा है. जहां अमेरिका जैसे अमीर देश के पास ‘टॉप 20 व्यस्त बंदरगाहों’ की सूची में सिर्फ 2 नाम (लॉस एंजिल्स और लॉन्ग बीच) शामिल हैं, वहीं भारत अपनी विस्तार योजनाओं और तेज विकास दर (Growth Rate) के दम पर बहुत जल्द इस लिस्ट में बड़ी पोजीशन हासिल करने वाला है.

बंदरगाहों के मामले में चीन से तेज है भारत की रफ्तार

भले ही वर्तमान में चीन के 7 बंदरगाह दुनिया के टॉप 10 में शामिल हों और ग्लोबल कंटेनर ट्रैफिक में उसकी हिस्सेदारी 40% से अधिक हो, लेकिन विकास की रफ्तार के मामले में भारत बाजी मार रहा है. जून 2024 से जून 2025 के बीच भारत ने ‘लाइनर शिपिंग कनेक्टिविटी’ (LSCI) में 18% की रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की है, जो दुनिया में सबसे अधिक है. इसके मुकाबले चीन और अन्य विकसित देशों की वृद्धि दर काफी स्थिर रही है.

अमेरिका से भी बेहतर: समय की बचत में हम आगे

हैरानी की बात यह है कि जहाजों को खाली करने और भेजने (Turnaround Time) के मामले में भारत के बंदरगाह अब अमेरिका और सिंगापुर से भी तेज हो गए हैं. भारत के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPA) में औसत टर्नअराउंड समय मात्र 22 घंटे रह गया है, जो वैश्विक बेंचमार्क से काफी बेहतर है. भारत का सागरमाला प्रोजेक्ट और पोर्ट कम्युनिटी सिस्टम जहाजों के रुकने के समय को 49% तक कम करने में सफल रहा है.

भारत के प्रमुख ‘गेम चेंजर’ सी पोर्ट्स

भारत के मुंद्रा, न्हावा शेवा और विझिंजम बंदरगाह अब 24,000 TEU से ज्यादा क्षमता वाले विशाल जहाजों को संभालने में सक्षम हैं. अडानी पोर्ट्स ने अकेले 450 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो हैंडल करने का मील का पत्थर पार कर लिया है और 2026 तक 500 मिलियन का लक्ष्य रखा है.

दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाह (2024-25 का डेटा)

रैंक | पोर्ट | देश | क्षमता (मिलियन TEU)
1. शंघाई, चीन 51.5
2. सिंगापुर 41.1
3. निंगबो-झोउशान चीन 39.3
16. लॉस एंजिल्स, अमेरिका 10.3
19. लॉन्ग बीच, अमेरिका 9.6
तेजी से बढ़ता भारत (Rank 23)


भारत केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि तकनीक में भी आगे निकल रहा है. दीनदयाल पोर्ट (गुजरात), पारादीप (ओडिशा) और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट को ‘ग्रीन हाइड्रोजन हब’ के रूप में विकसित किया जा रहा है. इससे भारत भविष्य में टिकाऊ लॉजिस्टिक्स का ग्लोबल लीडर बन जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि जिस रफ्तार से भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है, अगले कुछ वर्षों में भारत के कई बंदरगाह टॉप 10 की सूची में अपनी जगह पक्की कर लेंगे.

[स्रोत: Visual Capitalist, World Bank]

Bharat Express Desk

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