अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हुए नरम
India US Trade Deal: एक दौर था जब भारत को डेड इकोनॉमी कहकर डोनाल्ड ट्रंप लगातार टैरिफ बढ़ा रहे थे. धीरे-धीरे करके उन्होंने इसे 50 फीसदी तक पहुंचा दिया. इतनी है नहीं उनके मंत्री और करीबी भारत के खिलाफ जहर उगने का काम कर रहे हैं. हालांकि, दबाव की राजनीति में कुछ हासिल न होने के बाद अमेरिकी प्रशासन और डोनाल्ड ट्रंप की हवाई फिस्स होने लगी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. इसके साथ ही उन्होंने समझौते को लेकर भी बड़ा बयान दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले साल भारत आने के संकेत दिए हैं. शुक्रवार (7 नवंबर) को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने पुष्टि की कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (India US Trade Deal) को लेकर बातचीत सकारात्मक ढंग से आगे बढ़ रही है और वह इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगातार संपर्क में हैं. अगले साल भारत आने की अपनी योजना के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने स्पष्ट कहा, “हां, ऐसा हो सकता है.
‘बातचीत अच्छी चल रही है. वह मेरे दोस्त हैं, और हम बात करते हैं और वह चाहते हैं कि मैं वहां जाऊं. हम इस पर विचार करेंगे, मैं जाऊंगा.’ ट्रंप ने आगे कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मैं वहां जरूर जाऊंगा.’
हालांकि, इस सकारात्मक माहौल के बीच ट्रंप ने एक बार फिर यह बड़ा दावा दोहराया कि भारत ने रूस से तेल खरीदना लगभग बंद कर दिया है, एक ऐसा दावा जिस पर भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय ऊर्जा हितों को सर्वोपरि रखेगा. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने भी पीएम मोदी के प्रति ट्रंप के गहरे विश्वास को उजागर किया है, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक अहम कदम है.
व्हाइट हाउस की ओर से भारत के साथ ट्रेड डील पर सकारात्मक अपडेट मिला है. प्रेस सचिव कैरोलिना लेविट ने बताया था कि ट्रंप भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बहुत सकारात्मक हैं और उन्हें दोनों देशों के बीच के रिश्तों पर गहरा विश्वास है. उन्होंने कहा कि ट्रंप और पीएम मोदी कई मुद्दों पर सीधी बातचीत करते हैं.
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डोनाल्ड ट्रंप का संभावित भारत दौरा और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति उनकी लगातार तारीफ दर्शाती है कि अमेरिका, अतीत के टैरिफ विवादों के बावजूद, भारत के साथ अपने राजनीतिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए उत्सुक है. रूसी तेल खरीद पर ट्रंप के दावे भले ही भारत की आधिकारिक नीति से मेल न खाते हों, लेकिन ट्रेड डील पर सकारात्मक बातचीत दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिरोध को तोड़ने का संकेत देती है. चीन के प्रति ट्रंप के नरम रुख के साथ-साथ भारत के प्रति यह सकारात्मकता, भविष्य में एक नई व्यापारिक साझेदारी की नींव रख सकती है, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगी.
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