विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिका और रूस के बीच अलास्का शिखर सम्मेलन (Alaska Summit) में हुई प्रगति का स्वागत किया है. मंत्रालय ने भारत के इस रुख पर ज़ोर डाला है कि बातचीत और कूटनीति ही आगे का रास्ता है, क्योंकि दुनिया यूक्रेन में संघर्ष का जल्द अंत देखना चाहती है.
एक बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शिखर बैठक का स्वागत करता है और शांति की तलाश में उनका नेतृत्व अत्यधिक सराहनीय है. आगे का रास्ता केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है.
विदेश मंत्रालय का बयान
भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में हुई शिखर बैठक का स्वागत करता है. शांति की खोज में उनका नेतृत्व अत्यधिक सराहनीय है. भारत शिखर सम्मेलन में हुई प्रगति की सराहना करता है. आगे का रास्ता केवल बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है. दुनिया यूक्रेन में संघर्ष का जल्द अंत देखना चाहती है.
वैश्विक मंचों से लेकर अलग-अलग बयानों में भारत के शांति संदेश का दुनिया भर में स्वागत किया गया है. इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका और रूस ने यूक्रेन में संघर्ष में शांति लाने के उद्देश्य से अलास्का शिखर सम्मेलन का समापन किया.
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे अलास्का में एक महान और अत्यंत सफल दिन बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका “शांति समझौता” ही होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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