Iran US War Energy Crisis
Iran US War Energy Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच हुई जंग के बाद पूरी दुनिया में एनर्जी सप्लाई का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है. हालात ऐसे हो गए हैं कि अब अगर ईरान युद्ध को लेकर परमानेंट सीजफायर का ऐलान हो जाए और ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दे फिर भी तेल की कीमतें जंग से पहले वाली स्थिति में नहीं पहुंच सकती है.
युद्ध से पहले वाली स्थिति का अर्थ है कि जब वैश्विक स्तर पर सस्ता तेल और गैस उपलब्ध थे. बिजनेस भी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहे थे और लोगों की आमदनी बढ़ रही थी. पर अब इस जंग की वजह से हालात बेकाबू हो चले हैं. ऐसी कई वजहें यह बता रही हैं कि जंग से पहले वाले हालात दोबारा बहाल करना मुश्किल है.
इसे एक उदाहरण से समझते हैं- जब फारस की खाड़ी से एक टैंकर अपने खरीदार देशों के लिए निकलता है तो उसे वहां पहुंचने में डेढ़ महीने का समय लगता है. ईरान अमेरिका जंग के डेढ़ महीने हो चुके हैं, यानी युद्ध की वजह से जो टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, उनकी कमी अब देशों में दिखनी शुरू होगी. अब दुनिया असल में तेल की कमी का सामना करेगी.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख फातिह बिरोल के हवाले से बीबीसी ने कहा,
अप्रैल की स्थिति से मार्च कहीं ज्यादा खराब होगी. नुकसान अनुमान से भी दोगुना होगा. इसकी वजह से महंगाई में भयंकर बढ़ोतरी होगी और देशों का विकास धीमा हो जाएगा.
ईरान-अमेरिका युद्ध अब खत्म भी हो जाए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोल दिया जाए तो भी दुनिया में तेल और गैस की किल्लतें खत्म नहीं होगी. दुनिया अब तेल संकट के नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. इसकी पुष्टि अमेरिका ऊर्जा सूचना प्रशासन की ताजा रिपोर्ट भी कर रही है. जिसके मुताबिक,
ईरान युद्ध की वजह से दुनिया में तेल की कमी कई महीनों तक, यहां तक कि साल 2026 के अंत तक महसूस की जाएगी.
हालांकि मिडिल ईस्ट में शांति बनी रहती है तो तेल उत्पादन तुरंत शुरू हो सकता है. सऊदी अरब सहित आसपास के कई देशों के पास तेल निकालने का इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, लेकिन असली किल्कत गैस की होगी. ईरान जंग की वजह से दुनिया में गैस की स्थिति ज्यादा गंभीर बन गई है. इसका सबसे बड़ा कारण गैस इंफ्रास्ट्रक्चर है.
मिडिल ईस्ट में करीब डेढ़ महीने तक चली बमबारी में गैस उत्पादन के कारखानों को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट के करीब 40 से ज्यादा तेल और गैस के संयंत्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. आलम ये है कि अगर इनकी मरम्मत आज शुरू होती है तो इसे सही होने में कई महीने लग जाएंगे और इसपर अरबों डॉलर का खर्चा आएगा.
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फातिह बिरोल के मुताबिक युद्ध की वजह से गैस उद्योग की विश्वसनीयता पर चोट पहुंचा है. कभी एलएनजी को एक आसानी से मिलने वाला और भरोसेमंद विकल्प के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन दुनिया में पहले रूस गैस संकट और अब कतर गैस संकट की वजह से यह विश्वसनीयता खत्म हो गई है.
इस वजह से गैस की आपूर्ति में तेजी से सुधार संभव नहीं है. इसकी वजह से गैस की कीमतों में कई महीनों तक तेजी बनी रह सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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