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जेल में था एपस्टीन और बाहर आ रही थी काबा के कपड़े की खेप: 2017 की उस डील ने सबको चौंकाया

Jeffrey Epstein Files: अमेरिका के यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को जस्टिस डिपार्टमेंट ने कुछ दिनों पहले रिलीज कर दिया. इन एपस्टीन फाइलों में कुछ ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरे इस्लामी दुनिया को हैरान कर दिया है.

एपस्टीन फाइलों के रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2017 में सऊदी अरब के मक्का में मौजूद काबा को ढकने वाले पवित्र काले कपड़े के तीन टुकड़ों को जेफरी एपस्टीन के पास भेजा गया था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काबा के कपड़ों की ये खेप फरवरी और मार्च 2017 में UAE की एक महिला कारोबारी अजीजा अल अहमदी और सऊदी अरब के अब्दुल्लाह अल मारी ने मिलकर भेजी थी.

इस कपड़े को लेकर जेफरी एपस्टीन के भेजे गए ईमेल में बताया गया है कि ये तीनों कपड़े किस्वा से जुड़े थे.

किस्वा क्या है?

किस्वा वो काला कपड़ा होता है, जिसपर सुनहरे रंग की कढ़ाई होती है. इस काले कपड़े से ही काबा को ढका जाता है. हर साल लाखों मुसलमान काबा जाकर इस कपड़े को छूते हैं. मुस्लिम धर्म में इस कपड़े को काफी पवित्र माना जाता है.

हालांकि ईमेल में यह नहीं बताया गया है कि UAE की महिला कारोबारी की एपस्टीन से पहचान कैसे हुई और वो उसके टापू पर गई थी या नहीं.

30 लाख दस्तावेज जारी

बता दें कि, एपस्टीन फाइल से जुड़े ये दस्तावेज अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने 30 जनवरी को जारी कर दी थई. जिसमें करीब 30 लाख पन्ने, 1.8 लाख तस्वीर और लगभग 2000 वीडियोज हैं.

ईमेल में बताया गया है कि ये टुकड़े सऊदी अरब से ब्रिटिश एयरवेज की सहायता से अमेरिका के फ्लोरिडा भेजे गए थे. इन कपड़ों के 3 टुकड़ों में एक काबा के अंदर का है, दूसरा कपड़ा बाहर की परत वाला है. वहीं तीसरे टुकड़े का इस्तेमाल नहीं हुआ था.

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अल अहमदी ने अपने ईमेल में एपस्टीन को लिखा था,

काले टुकड़े को कम से कम एक करोड़ मुसलमानों ने छुआ है. ये सभी मुसलमान शिया, सुन्नी और दूसरे थे. वे काबा के 7 चक्कर लगाते हैं और छूने की कोशिश करते हैं. इस कपड़े में अपनी दुआएं, आंसू और उम्मीदें छोड़ते हैं ताकि उनकी दुआ कबूल हो.

यह शिपमेंट 2017 के मार्च महीने में फ्लोरिडा पहुंची थी. उस समय तक एपस्टीन को यौन अपराधी करार दिया गया था और वो जेल में था.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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