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कूटनीति की मेज पर दिखी मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी, पश्चिम एशिया संकट के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर और स्पेस से लेकर समुद्री सुरक्षा तक पर हुई बातचीत

Modi Trump Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात की. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं.

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों की प्रगति की समीक्षा की. पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है. व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है. भारत और अमेरिका आज केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर उभरे हैं.

पीएम मोदी ने की ट्रंप की सराहना

प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की सराहना की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा तनाव के बीच संवाद और कूटनीति ही स्थायी समाधान का रास्ता है. भारत लंबे समय से यह मानता रहा है कि किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ता है.

विशेष रूप से प्रधानमंत्री ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. भारत सहित अनेक देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं. ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता, तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.

समुद्र सुरक्षा को लेकर दी नसीहत

प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि संघर्ष की परिस्थितियों में निर्दोष नागरिकों और समुद्र में कार्यरत नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है. भारत का हमेशा से मानना रहा है कि मानवीय दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किसी भी संकट के समाधान का आधार होना चाहिए.

दोनों देशों के बीच बढ़ा है सहयोग

भारत और अमेरिका के संबंध पिछले दो दशकों में लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं. रक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जबकि व्यापारिक संबंध भी तेजी से बढ़े हैं. ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका भारत के लिए तेल और एलएनजी का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है. वहीं, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जाती है.

पश्चिम एशिया के संदर्भ में भारत की विशेष रुचि इसलिए भी है क्योंकि इस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा भारत के आर्थिक हितों, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई यह चर्चा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री स्थिरता जैसे व्यापक मुद्दों पर भी केंद्रित रही.

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कुल मिलाकर यह मुलाकात भारत की उस संतुलित और बहुआयामी विदेश नीति को दर्शाती है, जिसके तहत वह प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति, सुरक्षित समुद्री मार्गों और स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था की वकालत करता रहा है.

-भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

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