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“युद्ध के मैदान में नहीं बातचीत से निकलेगा समाधान” G-7 समिट में पीएम मोदी-जेलेंस्की की हुई बैठक, भारत ने बताया अपना स्टैंड

PM Modi Zelensky Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान व्लादिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत और यूक्रेन के बीच पिछले कुछ वर्षों में संवाद और सहयोग लगातार बढ़ा है. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करते हुए व्यापार, आर्थिक सहयोग, पुनर्निर्माण और मानवीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूक्रेन के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. युद्ध से पहले दोनों देशों के बीच कृषि, औषधि, शिक्षा, इंजीनियरिंग उत्पादों और औद्योगिक क्षेत्रों में अच्छा व्यापारिक संबंध था. हालांकि रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर पड़ा, लेकिन अब दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि व्यापारिक संबंधों को फिर से युद्ध-पूर्व स्तर तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.

नई दिल्ली और कीव के बीच आर्थिक सहयोग पर बातचीत

बैठक के दौरान भारत और यूक्रेन ने आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर भी विचार किया. यूक्रेन के पुनर्निर्माण में भारत की संभावित भूमिका, भारतीय कंपनियों की भागीदारी तथा तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. भारत ने पहले भी यूक्रेन को मानवीय सहायता, दवाइयां और राहत सामग्री उपलब्ध कराई है, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है.

इस मुलाकात में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत की उस स्थायी नीति को दोहराया कि किसी भी संघर्ष का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा शांति, संवाद और मानवता के मूल्यों के पक्ष में खड़ा रहेगा. भारत का मानना है कि किसी भी संघर्ष में सबसे अधिक प्रभावित आम नागरिक होते हैं, इसलिए शांति स्थापना और मानवीय सरोकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

लगातार गहरे हो रहे भारत-यूक्रेन के संबंध

भारत और यूक्रेन के संबंध सोवियत संघ के विघटन के बाद से लगातार विकसित हुए हैं. यूक्रेन लंबे समय तक भारतीय छात्रों, विशेषकर मेडिकल शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. इसके अलावा कृषि उत्पादों, सूरजमुखी तेल, रक्षा क्षेत्र के कुछ सहयोग तथा औद्योगिक व्यापार में भी दोनों देशों की भागीदारी रही है.

निरंतर संवाद ही एकमात्र समाधान

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने एक संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई. भारत ने लगातार हिंसा समाप्त करने, संवाद को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की वकालत की है. वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन यात्रा और उसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़े उच्चस्तरीय संपर्कों ने संबंधों को नई गति दी. एवियन में हुई यह मुलाकात उसी निरंतर संवाद का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें भारत शांति प्रयासों का समर्थन करते हुए यूक्रेन के साथ अपने आर्थिक और मानवीय सहयोग को भी मजबूत करना चाहता है.

ये भी पढ़ें- भारत-जर्मनी संबंधों को मिलेगी नई गति, G-7 समिट में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के बीच हुई बैठक

मोदी और ज़ेलेंस्की की यह बैठक इस संदेश को ज्यादा तवज्जो देती है कि भारत वैश्विक संघर्षों के बीच भी संवाद, विकास और मानवता को प्राथमिकता देने की अपनी नीति पर कायम है, साथ ही यूक्रेन के साथ व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा देने का इच्छुक है.

-भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

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