नेपाल में हालात काबू से बाहर हैं. सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ आंदोलन अब बड़े राजनीतिक संकट में बदल चुका है. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस्तीफा दे चुके हैं उनके साथ डिप्टी पीएम और कई मंत्री भी पद छोड़ चुके हैं. सोशल मीडिया पर लगा प्रतिबंध सरकार ने हटा लिया लेकिन गुस्साए युवाओं, खासकर Gen-Z ने अब भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के मुद्दे उठा लिए हैं. नतीजा यह कि देश में राजनीतिक उथल-पुथल थमने का नाम ही नहीं ले रही.
दिलचस्प बात यह है कि ऐसी स्थिति सिर्फ नेपाल में नहीं है. एशिया से लेकर यूरोप और अफ्रीका तक कई देश इन दिनों राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं. फ्रांस, जापान, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे बड़े देशों से लेकर माली, सूडान और लेबनान तक जनता सड़कों पर है और सरकारें डगमगा रही हैं.
नेपाल पहले से ही कर्ज और भ्रष्टाचार के बोझ तले दबा हुआ था. अगस्त में सरकार ने अचानक 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया जिनमें फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब और X शामिल थे. यही फैसला युवाओं के गुस्से की चिंगारी बना. विरोध इतना हिंसक हुआ कि करीब दो दर्जन लोगों की जान चली गई. दबाव में आकर सरकार को बैन हटाना पड़ा मगर अब लोग बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी को लेकर जवाब मांग रहे हैं.
यूरोप की बड़ी ताकत फ्रांस भी भारी संकट से गुजर रहा है. तीन साल में चार प्रधानमंत्री इस्तीफा दे चुके हैं. हाल ही में पीएम फ्रांस्वा बायरो ने केवल 9 महीने में पद छोड़ दिया. इसका पीछे का वजह किसी भी पार्टी को बहुमत न मिलना और बजट कटौती जैसे unpopular फैसले है. जनता गुस्से में है, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की लोकप्रियता गिर रही है और विपक्ष लगातार अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है.
जापान की राजनीति भी हिल चुकी है. सात दशकों से सत्ता पर काबिज लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) हालिया चुनाव हार गई. पीएम शिगेरु इशिबा ने इस्तीफा दे दिया. धीमी विकास दर और सरकार की नाकामियों ने जनता का भरोसा तोड़ा. अब नए चेहरों जैसे साने ताकाइची और शिंजिरो कोइजुमी को पार्टी का भविष्य माना जा रहा है.
थाईलैंड में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पीएम थाकसिन शिनावात्रा को भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराया. उनकी बेटी और मौजूदा पीएम पेटोंगटर्न को भी अयोग्य घोषित कर दिया गया. इससे जनता भड़क उठी और सड़कों पर विरोध शुरू हो गया.
इंडोनेशिया में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मुश्किलें टैक्स बढ़ाने से बढ़ीं. वैट 11 से 12 प्रतिशत किया गया जिससे महंगाई बढ़ी और लोग भड़क उठे. राजधानी जकार्ता में हिंसक प्रदर्शन हुए जिन्हें काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी.
माली, मंगोलिया, आर्मेनिया, लेबनान, सूडान और कॉन्गो में भी जनता सड़कों पर है. कहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ, कहीं सैन्य शासन के खिलाफ और कहीं गृहयुद्ध की वजह से अस्थिरता बनी हुई है.
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नेपाल से लेकर फ्रांस और जापान तक हर देश की समस्या अलग है लेकिन तस्वीर एक जैसी है. जनता अब चुप नहीं बैठ रही. सोशल मीडिया ने उन्हें आवाज दी है और राजनीतिक गलियारे इस नए दौर की चुनौती से निपटने की राह खोज नहीं पा रहे.
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-भारत एक्सप्रेस
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