नेपाल में सरकार क्यों गिरी?
Nepal Political Crisis: एक छोटी सी चिंगारी बड़े जंगल में आग लगा देती है. नेपाल में भी कुछ ऐसा ही हुआ. इसी भूचाल ने केपी शर्मा ओली की सरकार को हिलाकर रख दिया. Gen-Z आंदोलन के कारण उन्हें इस्तीफा तक देना पड़ा और अब वो गायब हैं. इस पूरे बवाल की कहानी किसी बड़े सियासी दांव-पेच से नहीं, बल्कि एक साधारण से कार एक्सीडेंट से हुई थी. इस हादसे ने जनता को यह फील कराया कि सरकार और नेताओं के नजर में उनकी कोई अहमियत नहीं है. इसके बाद सोशल मीडिया पर आए बैन आक्रोश को हवा दिया. आज उसका परिणाम हम सबके सामने है.
एक मंत्री की गाड़ी ने जब 11 साल की बच्ची को टक्कर मारी और सिस्टम ने उसे ‘छोटी बात’ कहकर टाल दिया. लोगों के गुस्से ने उग्र रूप ले लिया. इस हादसे ने पहले से ही सुलग रहे गुस्से में आग में घी का काम किया और युवाओं ने एक ऐसी क्रांति (Gen-Z movement Nepal) को जन्म दिया, जिसने एक सरकार को ही उखाड़ फेंका.
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नेपाल में 11 साल की बच्ची के साथ हुए हादसे ने देश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है. बच्ची को एक प्रांतीय मंत्री की सरकारी गाड़ी ने टक्कर मार दी थी, जिससे वह घायल हो गई. इसके बाद सरकार का रवैया और भी भड़काने वाला था, जब मंत्री के ड्राइवर को 24 घंटे के अंदर रिहा कर दिया गया और प्रधानमंत्री केपी ओली ने इसे मामूली घटना करार दिया. इस घटना ने युवाओं में सरकार के खिलाफ गुस्से को भड़का दिया, जो पहले से ही बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर असंतुष्ट थे. सोशल मीडिया पर बच्ची की तस्वीरें वायरल हुईं और लोगों ने सरकार के खिलाफ विरोध जताया.
नेपाल में 6 सितंबर को सोशल मीडिया में पाबंदी लगाई गई. इसी रोज सुबह 7 बजे के आसपास एक हादसा हुआ. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बताया जा रहा है कोशी प्रांत के वित्त मंत्री राम बहादुर मगर की सरकारी गाड़ी ने ललितपुर के हरिसिद्धि क्षेत्र में सड़क पार कर रही बच्ची को टक्कर मार दी. हादसे के बाद, मंत्री का ड्राइवर भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया. ड्राइवर को हिरासत में लिया गया, लेकिन जनता के गुस्से के बावजूद उसे 24 घंटे के भीतर रिहा कर दिया गया.
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दावा किया जा रहा है कि ड्राइवर को नेताओं के दबाव में छोड़ दिया गया. पुलिस के ऊपर उसे रिहा करने का दबाव था. इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस पूरे मामले को ‘छोटी सी बात’ कहकर टाल दिया, जिससे युवाओं का गुस्सा और भड़क गया. हादसे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिससे Gen-Z के युवाओं में सरकार के खिलाफ आक्रोश फैल गया. माना जा रहा है इसी घटना और उसके बाद आए बयान ने लोगों को क्रांति का रुख करने का बल दिया. नतीजा सरकार गिर गई और देश सियासी संकट के दौर में पहुंच गया.
नेपाल का ये कार एक्सीडेंट सिर्फ एक हादसा नहीं था, बल्कि यह एक प्रतीक बन गया. यह उस गुस्से (Violence in Nepal) का प्रतीक था जो नेताओं की जवाबदेही की कमी, भ्रष्टाचार और आम जनता के प्रति उनके असंवेदनशील रवैये को लेकर था. 24 घंटे के भीतर ड्राइवर की रिहाई और प्रधानमंत्री का गैर-जिम्मेदाराना बयान, ये वो आखिरी तिलस्मी ताले थे, जिन्हें तोड़कर गुस्सा सड़कों पर आ गया. यह घटना बताती है कि जब लोग सत्ता से निराश हो जाते हैं, तो एक छोटी सी घटना भी क्रांति का बिगुल बजा सकती है.
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