Pakistan Reject Trump Peace Plan: इजरायल-गाजा युद्ध को खत्म करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा पेश किए गए 20 सूत्री प्रस्ताव को लेकर अब पाकिस्तान की सरकार बैकफुट पर आ गई है. लोग पाकिस्तान की शहबाज सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं. लोगों के गुस्से को देखते हुए अब पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने शुक्रवार को कहा कि ट्रंप के द्वारा पेश किया गया 20 सूत्री प्रस्ताव मुस्लिम देशों की तरफ से तैयार किये गए प्रस्ताव से बिल्कुल अलग है.
ट्रंप के गाजा पीस प्लान प्रस्ताव को पाकिस्तान के द्वारा समर्थन देने के बाद शहबाज हुकूमत लोगों के गुस्से का शिकार हो रही है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री डार ने कहा कि, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य मुस्लिम देशों ने जिस प्रस्ताव को समर्थन दिया था वो इससे मेल नहीं खाता.
अपने बचाव में इशाक डार ने आगे कहा कि, मैंने साफ किया है कि, ट्रंप ने जो 20 सूत्री पीस प्रस्ताव सार्वजनिक किया है वो हमारे नहीं है. ये हमारे ड्राफ्ट से बिल्कुल अलग हैं. इसमें बदलाव किया गया है.
इशाक डार की यह टिप्पणी तब आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के द्वारा प्रस्तावित पीस प्लान का पाक पीएम शहबाज शरीफ के समर्थन पर पूरे पाकिस्तान में गुस्सा भड़का हुआ है. इस प्रस्ताव में दिए कुछ ऐसी शर्त हैं जिसपर पाकिस्तान की जनता को आपत्ति है. जिसमें ‘युद्ध विराम के 72 घंटे के अंदर सभी जीवित और मृत बंधकों को वापस करना होगा’ मुख्य है.
पाकिस्तान के जीओ न्यूज से बात करते हुए डार ने कहा था ‘यह हमारा डॉक्यूमेंट नहीं है. हमें कुछ बिंदुओं पर असहमति है. जिसपर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. अगर ऐसा नहीं होता तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे.’
डार ने बताया कि पाकिस्तान की प्रमुख प्राथमिकता है गाजा में तत्काल संघर्षविराम और खून-खराबा रोकना. इसके साथ ही पाकिस्तान की यह भी मांग है कि संघर्ष विराम के तुरंत बाद गाजा में मानवीय सहायता भेजना और विस्थापन को रोकना है.
ट्रंप के द्वारा प्रस्तावित पीस प्लान का शहबाज शरीफ ने ट्वीट कर समर्थन किया. जिसमें उन्होंने लिखा कि, मुझे भरोसा है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस समझौते को हकीकत में बदलने की हर संभव मदद करने को तैयार हैं. ट्रंप के प्रस्ताव का समर्थन करते ही पाकिस्तान की जनता आग-बबूला हो गई.
पाकिस्तानियों का कहना था कि उन्होंने ट्रंप को खुश करने के लिए इस प्रस्ताव का समर्थन किया है. जबकि यह प्रस्ताव फिलिस्तीनियों के बजाय इजरायल के हित में अधिक है. पाक आलोचकों ने शहबाज सरकार पर पाकिस्तान की फिलिस्तीन नीति को कमजोर करने का आरोप लगाया है.
-भारत एक्सप्रेस
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