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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर कहर! झूठे ईशनिंदा केस में फंसे पादरी जफर भट्टी की जेल से निकलने के बाद मौत, मानवाधिकार रिपोर्ट में हुआ भयंकर खुलासा

Pakistan Minority Persecution: पाकिस्तान की जिहादी सरकार अल्पसंख्यकों पर कहर बनकर टूट पड़ी है. इसका एक वाकया पाकिस्तान के एक प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार समूह ने मंगलवार को बताया. जिसमें पाकिस्तान में एक ईसाई आध्यात्मिक नेता की मौत के बारे में जानकारी दी है, जिन्होंने एक ऐसे अपराध के लिए 13 दर्दनाक साल जेल में बिताए जो उन्होंने किया ही नहीं था, और फिर उन्हें झूठे ईशनिंदा के आरोपों से बरी कर दिया गया, जिसने उनकी स्वतंत्रता, स्वास्थ्य और शांति छीन ली थी.

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) के अनुसार, पादरी जफर भट्टी की मृत्यु कोई अकेली त्रासदी नहीं है, यह पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के संस्थागत उत्पीड़न का आईना है.

रिहाई के दो दिन बाद हुई मौत

भट्टी का 5 अक्टूबर को, रिहाई के दो दिन बाद ही, हृदय गति रुकने से निधन हो गया. पाकिस्तान की भयावह जेल व्यवस्था में वर्षों की यातना, अपमान और उपेक्षा ने उनके स्वास्थ्य को तहस-नहस कर दिया था.

पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों में भय का माहौल

अधिकार संस्था ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे उनकी पत्नी नवाब बीबी का दुःख ऐसी त्रासदियों के आदी राष्ट्र की खामोशी को चीरता हुआ दिखाई दिया. इस बात पर जोर देते हुए कि उनकी आवाज न केवल एक पति की मौत से दुखी पत्नी की, बल्कि पाकिस्तान के हर उस ईसाई, अहमदिया, हिंदू या शिया की आवाज है जो आरोप, हिंसा या कारावास के निरंतर भय में रहता है.

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ईशनिंदा कानून की आड़ में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न

वीओपीएम ने कहा कि पादरी जफर की पीड़ा सबूतों से नहीं, बल्कि नफरत से उपजे आरोपों से शुरू हुई. पाकिस्तान के अनगिनत ईसाइयों और अल्पसंख्यकों की तरह, वह देश के दुरुपयोग किए गए ईशनिंदा कानूनों का निशाना बन गए- ऐसे कानून जिन्होंने आस्था को हथियार और न्याय को तमाशा बना दिया है.

इसमें आगे कहा गया है कि 13 साल तक उन्हें गंदी जेल की कोठरियों में बंद रखा गया, उचित स्वास्थ्य सेवा से वंचित रखा गया और एक ऐसे अपराध के लिए अपराधी करार दिया गया जो कभी हुआ ही नहीं. उनकी अपीलों में देरी हुई, सुनवाई स्थगित की गई और राज्य की अनदेखी के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता गया.

-आईएएनएस से इनपुट पर आधारित

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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