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माउंटेन क्लाइंबिंग के शौक बना जानलेवा, स्पैंटिक पीक पर पाकिस्तानी डॉक्टर की गई जान

Pakistani Mountaineer Dr Asma Mushtaq Death: कहा जाता है कि पहाड़ चढ़ना मुश्किल नहीं होता, मुश्किल होता है उसके सामने खड़े होकर पहला कदम उठाना. लेकिन कभी-कभी पहला कदम ही आखिरी हो जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ पाकिस्तान की पर्वतारोही डॉ. अस्मा मुश्ताक के साथ. वो पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले गिलगिट-बाल्टिस्तान में मौजूद स्पैंटिक पीक (गोल्डन पीक) फतह करने गईं थी. 7027 मीटर ऊंची स्पैंटिक चोटी छूने के बाद जब वो नीचे उतर रही थीं तो 6,250 मीटर की ऊंचाई पर उनकी अचानक से मौत हो गई. बताया जा रहा है कि अधिक ऊंचाई पर जाने के बाद हाइपोक्सिया या ऑक्सीजन की कमी के चलते उनकी मौत हुई है.

डॉ. अस्मा मुश्ताक की मौत की जानकारी मिलने के बाद उनके शव को नीचे उतारने का काम शुरू किया गया था, लेकिन भारी बर्फबारी के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया गया है.

भारी बर्फबारी के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन पर ब्रेक

पाकिस्तानी न्यूज द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. मुश्ताक के शव को उतारने के लिए 6 लोगों का एक बचाव दल कैंप-2 तक पहुंच गया था. जब वो कैंप-3 तक पहुंचने का प्रयास करने लगे तभी भारी बारिश और बर्फबारी शुरू हो गई. जिसके चलते वो फिर से बेस कैंप आने पर मजबूर हो गए.

पाकिस्तानी पर्वतारोही डॉ. अस्मा मुश्ताक की तस्वीर (सोर्स-यूट्यूब)

बाल्टिस्तान डिवीजन के कमिश्नर कमाल खान के हवाले से बताया गया है कि लगातार हो रही भारी बर्फबारी और बहुत तेज हवाओं के चलते वहां के हालात बेहद खराब और जोखिम वाले हो गए हैं. जिसकी वजह से बचाव दल को बेस कैंप लौटना पड़ा.

ब्रिटेन में डॉक्टर थीं मुश्ताक

बता दें कि, 6000 मीटर से अधिक ऊंचाई से शवों को लाना बेहद जोखिम भरा काम होता है. कई मामलों में इतनी ऊंचाई पर फंसे शवों को लाने के बजाय वहीं छोड़ दिया जाता है. धीरे-धीरे वो बर्फ के नीचे दफन हो जाते हैं. दुनिया के अन्य चोटियों जैसे-एवरेस्ट या के-2 पर ऐसे कई डेथ जोन हैं, जहां चढ़ाई के दौरान जान गंवाने वाले पर्वतारोहियों के शव दिख जाते हैं.

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मुश्ताक मूल रूप से लाहौर की रहने वाली थीं. वे यूके में प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ के रूप में काम कर रही थीं. चिकित्सा पेशे से अलावा उन्हें ब्लॉगिंग और पर्वतारोहण का शौक था. इससे पहले वो कई चोटियों पर चढ़ चुकी थीं. इससे संबंधित वीडियो और तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करती रहती थीं.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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