पीएम मोदी अपनी छह दिवसीय विदेश यात्रा का पहला चरण सफलतापूर्वक समाप्त कर दूसरे पड़ाव के लिए ऑस्ट्रेलिया रवाना हो गए हैं. उनकी रवानगी के समय इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने खुद एयरपोर्ट पहुंचकर उन्हें बेहद आत्मीयता के साथ विदा किया. पीएम मोदी का यह तीन दिवसीय इंडोनेशिया दौरा कूटनीतिक और सामरिक रूप से बेहद सफल माना जा रहा है, जिसमें ‘ब्रह्मोस’ और ‘अस्त्र’ मिसाइल निर्यात को लेकर हुए ऐतिहासिक समझौतों से दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को एक नई और अभूतपूर्व मजबूती मिली है.
जकार्ता से रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने योग्याकार्ता स्थित एक हजार साल से भी अधिक पुराने प्रसिद्ध प्रमबानन हिंदू मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ मिलकर ‘प्रमबानन मंदिर पुनर्स्थापन (कंजर्वेशन) परियोजना’ का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया.
इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी भावुक हो उठे. उन्होंने भगवान शिव के साथ अपने गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि-
“यह मेरा सौभाग्य है कि कहीं न कहीं मुझे शिवजी के साथ जुड़ने का अवसर मिल ही जाता है. मेरा जन्म वडनगर में हुआ, वहाँ हाटकेश्वर महादेव एक बहुत बड़ा तीर्थ क्षेत्र है. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से सबसे पहला ज्योतिर्लिंग ‘सोमनाथ’ भी गुजरात की पावन धरती पर है, और उसके विकास में भी मेरी सीधी जिम्मेदारी है. इसके साथ ही, मेरे राजनीतिक क्षेत्र काशी विश्वनाथ महादेव के आशीर्वाद भी निरंतर मुझ पर बने रहे हैं.”
उन्होंने देश-विदेश में चल रही विभिन्न सांस्कृतिक पुनर्निर्माण परियोजनाओं से जुड़े रहने को भी अपनी किस्मत से जोड़ा. पीएम मोदी ने आगे कहा:
“चाहे केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण हो, चाहे उज्जैन महाकाल लोक का पुनर्निर्माण हो या आज यहाँ पर आकर करीब 1000-1200 साल पुरानी ब्रह्मा, विष्णु, महेश की यादों से जुड़ी हुई हमारी सांस्कृतिक विरासत का पुनरुद्धार और उसके रिनोवेशन (जीर्णोद्धार) का काम प्रारंभ करने का सौभाग्य मुझे मिला हो मैं इसके लिए अपने आप को बहुत बड़ा भाग्यशाली मानता हूँ.”
प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन दिवसीय यात्रा भारत के लिए बड़ी उपलब्धियों से परिपूर्ण रही है. इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल 20 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. इनमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और डिजिटल भुगतान (UPI इंटीग्रेशन) जैसे कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं. इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को नई गति देना और आपसी आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना है.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और इंडोनेशिया केवल समुद्री पड़ोसी ही नहीं हैं, बल्कि मजबूत रणनीतिक साझेदार भी हैं. दोनों वैश्विक नेताओं ने रक्षा और समुद्री सहयोग को और अधिक व्यापक व गहरा बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
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इसके साथ ही, दोनों देशों ने भारत की सुपरसोनिक क्रूज ‘ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली’ और ‘एयर-टू-एयर अस्त्र मिसाइल’ सहयोग समझौते के जरिए रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का स्वागत किया. समुद्री क्षेत्र (मैरीटाइम सेक्टर) में भी दोनों देशों ने मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA), समुद्री संपर्क (कनेक्टिविटी), तटीय निगरानी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), प्रदूषण नियंत्रण और खोज एवं बचाव (SAR) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. दोनों नेताओं का दृढ़ मानना है कि यह आपसी सहयोग पूरे हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने में गेमचेंजर साबित होगा.
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