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“तात्कालिक हित नहीं दीर्घकालिक स्थिरता पर हो फोकस” जानिए पीएम मोदी के जी-7 संबोधन की 5 सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बातें

PM Modi G7 Summit: फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “नए साझेदारी संबंधों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण” विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र में अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि आज का विश्व पहले की तुलना में कहीं अधिक परस्पर जुड़ा हुआ और एक-दूसरे पर निर्भर है. ऐसे समय में देशों के बीच सहयोग, संवाद और साझेदारी का महत्व और भी बढ़ जाता है.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान कोई भी देश अकेले नहीं कर सकता. जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक अस्थिरता, तकनीकी परिवर्तन तथा क्षेत्रीय संघर्ष जैसी समस्याओं से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा. उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसी साझेदारियों की आवश्यकता है जो केवल तात्कालिक हितों तक सीमित न हों, बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता और साझा विकास पर आधारित हों.

भरोसे को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता

उन्होंने कहा कि किसी भी सफल साझेदारी की सबसे मजबूत नींव विश्वास होती है. यदि देशों के बीच पारदर्शिता, विश्वसनीयता और आपसी सम्मान का भाव नहीं होगा, तो सहयोग की भावना भी कमजोर पड़ जाएगी. इसलिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भरोसे को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए. विश्वास ही वह आधार है, जो विभिन्न देशों और समाजों को एक साझा उद्देश्य के लिए साथ लेकर चल सकता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की आकांक्षाओं और चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए. विकासशील देशों की आवाज को सुनना और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में उचित भागीदारी देना एक अधिक न्यायसंगत और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.

वैश्विक सहयोग का केंद्र बनाने की आवश्यकता

उन्होंने समावेशी विकास, सतत प्रगति और मानव कल्याण को वैश्विक सहयोग का केंद्र बनाने की आवश्यकता पर बल दिया. भारत की ओर से उन्होंने यह संदेश दिया कि देश हमेशा ऐसी पहलों का समर्थन करता रहेगा, जो दुनिया में शांति, स्थिरता, समृद्धि और सामूहिक प्रगति को बढ़ावा दें.

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प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नई साझेदारियों का निर्माण केवल समझौतों से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, समानता, सम्मान और साझा जिम्मेदारी की भावना से ही संभव है. यही दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है.

– भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

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