PM Modi In Seychelles
PM Modi In Seychelles: सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वहां के सेशेल्स नेशनल बोटेनिकल गार्डन में राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ एक पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया. इस अवसर पर दोनों नेताओं ने कोको डी मेर (Coco de Mer) का पौधा लगाया, जो सेशेल्स की सबसे विशिष्ट और दुर्लभ वनस्पतियों में से एक माना जाता है.
प्रधानमंत्री ने इस अवसर को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और सतत विकास के प्रति भारत और सेशेल्स की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देश जैव विविधता की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित पृथ्वी छोड़ने के लक्ष्य के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण का यह आयोजन जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती के बीच प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है. भारत और सेशेल्स दोनों ही समुद्री पारिस्थितिकी, वन संरक्षण और टिकाऊ विकास को अपनी विकास नीतियों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं.
कोको डी मेर दुनिया के सबसे अनोखे और दुर्लभ ताड़ वृक्षों में से एक है. यह प्राकृतिक रूप से केवल सेशेल्स के कुछ द्वीपों पर पाया जाता है और इसे देश की राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके विशाल बीज हैं, जिन्हें दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक बीज माना जाता है. इसके फल भी अत्यंत भारी होते हैं और ये पकने में भी 5-10 साल का समय लेते हैं. अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण यह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.
कोको डी मेर का पौधा बहुत धीमी गति से बढ़ता है और परिपक्व होने में कई दशक लग सकते हैं. इसकी दुर्लभता और पारिस्थितिक महत्व को देखते हुए इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यही कारण है कि इसे सेशेल्स के राष्ट्रीय प्रतीक (Coat of Arms) में भी स्थान दिया गया है.
भारत और सेशेल्स लंबे समय से समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं. दोनों देश ब्लू इकोनॉमी, समुद्री जैव विविधता के संरक्षण, तटीय पारिस्थितिकी की सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं.
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विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त वृक्षारोपण जैसे प्रतीकात्मक कार्यक्रम केवल राजनयिक परंपरा नहीं होते, बल्कि वे यह संदेश भी देते हैं कि दोनों देश वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए साझा दृष्टिकोण रखते हैं और हरित भविष्य के निर्माण के लिए सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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