PM Modi in Thailand: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज थाईलैंड की दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत की. यह यात्रा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भारतीय समुदाय से मुलाकात की और थाईलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान किया. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर थाईलैंड की पीएम पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा की प्रशंसा की. उन्होंने कहा, “अभी मुझे पाली की Tipitaka की प्रति भेंट की गई. पाली वास्तव में एक सुंदर भाषा है, जिसमें भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का सार समाया हुआ है. जैसा कि आप सभी जानते हैं, हमारी सरकार ने पिछले वर्ष पाली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था. दुनिया भर के लोगों ने इस निर्णय की सराहना की है और जिसके कारण भाषा पर शोध के साथ-साथ अध्ययन को भी प्रोत्साहन मिला है.”
पीएम मोदी के बैंकॉक पहुंचने पर एक भव्य स्वागत हुआ. भारतीय समुदाय के सदस्य और स्थानीय लोग मिलकर उनके स्वागत में उत्साहित दिखे. इस मौके पर गुजरात से आई गरबा नृत्य टीम ने शानदार प्रस्तुति दी, वहीं थाई समुदाय ने अपने पारंपरिक मंत्रों के साथ उन्हें सम्मानित किया. खासकर थाईलैंड में रामायण के थाई संस्करण ‘रामाकेन’ का मंचन देखने के बाद पीएम मोदी ने भारतीय और थाई संस्कृति के मिलन को सराहा.
PM मोदी को इस अवसर पर कई सांस्कृतिक उपहार भी दिए गए. सिक्ख समुदाय ने उन्हें गोल्डन टेम्पल का एक स्मृति चिन्ह भेंट किया, वहीं जैन समुदाय ने नवजार मंत्रों का पाठ किया. ISKCON के सदस्य ने उन्हें भगवद गीता भेंट की. ये सभी प्रतीक भारतीय संस्कृति के गहरे प्रभाव को दर्शाते हैं.
यात्रा के दौरान थाई प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने प्रधानमंत्री मोदी को विशेष उपहार दिया – “द वर्ल्ड टिपिटाका: सज्जया फोनेटिक एडिशन”. यह एक बहुत ही मूल्यवान और महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें भगवान बुद्ध के उपदेशों का संग्रह है. इस संस्करण में 108 खंड शामिल हैं, जो बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समेटे हुए हैं. इस उपहार के माध्यम से भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को और मजबूती मिली है.
पीएम मोदी के थाईलैंड दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) सम्मेलन था, जिसमें उन्होंने विभिन्न देशों के नेताओं से मुलाकात की. इस सम्मेलन में भारत और थाईलैंड के व्यापारिक संबंधों को लेकर चर्चा हुई. साथ ही, यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि पीएम मोदी बांग्लादेश के अंतरिम प्रधानमंत्री यूनुस खान से भी मुलाकात करेंगे, जो पिछले साल के सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के नेताओं की पहली बैठक हो सकती है.
भारत और थाईलैंड के संबंध 2,000 से भी अधिक साल पुराने हैं. सम्राट अशोक के समय में बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ भारतीय संस्कृति का प्रभाव थाईलैंड में देखा गया. भारत से थाईलैंड में बौद्ध धर्म का प्रवेश हुआ, और थाईलैंड में रामायण को ‘रामाकेन’ के नाम से जाना जाता है. यह संबंध आज भी मजबूत हैं, और भारत-थाईलैंड के रिश्ते केवल ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि व्यापारिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी गहरे हैं.
आज से 75 साल पहले दोनों देशों के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए थे. यह यात्रा एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच मजबूत और समृद्ध रिश्तों की पुष्टि की है. भारत और थाईलैंड के संबंध अब तक की यात्रा में एक नए अध्याय में प्रवेश कर चुके हैं.
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