PoK Violence
PoK Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में कोहराम मचा हुआ है. आम कश्मीरियों का विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक हिंसा की तरफ बढ़ रही है. पीओके के कथित पूर्व प्रधानमंत्री सरदार तनवीर इलियास के काफिले पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हमला कर दिया. इस हमले में उनके सिक्योरिटी गार्ड के सिर में गोली लग गई. जिससे उसकी मौत हो गई.
बताया जा रहा है कि यह हमला तब हुआ जब वो एक चुनावी रैली में शामिल होने के लिए सेंट्रल बाग में जा रहे थे. सेंट्रल बाग वहीं जगह है जहां पर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. पाकिस्तान अब कश्मीर के आम नेताओं पर हमला कर पीओके में चुनाव की कोशिशों को पटरी से उतारना चाहता है.
इस हमले में तनवीर इलियास पूरी तरह सुरक्षित बच गए, लेकिन उन पर हुए जानलेवा हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है. यह घटना बताती है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति किस कदर बिगड़ चुकी है. चुनाव से पहले पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा अब हिंसक रूप लेता दिखाई दे रहा है.
#PoJKProtests : POJK में पाकिस्तानी फ़ौज का क्रूर चेहरा
निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर मुनीर सेना कर रही फायरिंग
एक माह में 400 से अधिक प्रदर्शनकारियों की हो चुकी है मौत#POJK #POK #PakistanOccupiedKashmir #Pakistan #Kashmir #HumanRights #JKnow pic.twitter.com/boTGaVe2lv
— Jammu-Kashmir Now (@JammuKashmirNow) July 15, 2026
मुख्यधारा के किसी बड़े राजनेता पर हुआ यह हमला ऐसे समय में सामने आया है, जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पूरे पीओके में बड़े पैमाने पर आंदोलन चला रही है. पिछले करीब एक महीने से कमेटी के नेतृत्व में लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का मकसद पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों को क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने से रोकना है. कई राजनीतिक दलों और उनके उम्मीदवारों को खुले तौर पर चेतावनी भी दी जा रही है.
बीते सप्ताह प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के एक प्रमुख उम्मीदवार की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया था. स्थानीय नेताओं का कहना है कि पाकिस्तानी राजनीतिक दलों को उन इलाकों में वोट मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, जहां सुरक्षा बलों की कार्रवाई में आम नागरिकों की जान गई है.
पीओके के मौजूदा हालात मुख्यधारा के राजनेताओं और सुरक्षा बलों, दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन गए हैं. स्थानीय लोगों में बढ़ रहा आक्रोश लंबे समय से जारी आर्थिक शोषण, संसाधनों की अनदेखी और राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखे जाने का नतीजा माना जा रहा है. हालिया घटनाएं यह भी दिखाती हैं कि पीओके में हालात संभालने में इस्लामाबाद लगातार नाकाम साबित हो रहा है.
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दूसरी ओर, पाकिस्तान की सरकार और सेना हर हाल में पीओके में चुनाव कराने पर अड़ी हुई है. वहीं स्थानीय नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने भी चुनाव रोकने को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है. मौजूदा विवाद की सबसे बड़ी वजह पीओके की आरक्षित सीटों का मुद्दा बताया जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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