नेपाल और चीन की सीमा के पास रासुवागढ़ी इलाके में 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी. कुछ ही समय में पानी, कीचड़ और चट्टानों का ऐसा सैलाब आया कि उसके रास्ते में जो भी आया, वह बह गया. नेपाल के प्रधानमंत्री ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अब तक 50 लोगों की मौत की जानकारी दी है. राहत और बचाव अभियान जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
लेकिन सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी तबाही शुरू कहां से हुई? सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों ने इस घटना की शुरुआती वजह को समझने में अहम सुराग दिया हैं.
प्लैनेट लैब्स की ओर से जारी सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में पता चला है कि रासुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया. इस भूस्खलन में बर्फ और भारी मात्रा में चट्टानें शामिल थीं.
इन मलबों ने ल्हेंडे नदी के रास्ते को रोक दिया. इसके बाद नदी का पानी अचानक जमा हुआ और फिर तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ा. पानी के साथ मिट्टी, बर्फ और चट्टानों का मलबा भी बहता चला गया. देखते ही देखते यह एक बेहद खतरनाक फ्लड में बदल गया, जिसने नदी के आसपास मौजूद ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया.
सैटेलाइट तस्वीरों में इस तबाही से पहले और बाद की स्थिति का साफ अंतर दिखाई देता है. 25 अगस्त की तस्वीरों में इलाके की स्थिति सामान्य नजर आती है. नदी अपने रास्ते में बह रही थी और पहाड़ी क्षेत्र में भी कोई बड़ी असामान्य गतिविधि दिखाई नहीं देती.
लेकिन 26 अगस्त की तस्वीरों में पूरा इलाका बदला हुआ नजर आता है. भूस्खलन के बाद जमा हुआ मलबा और बाढ़ का फैलाव इस बात की ओर इशारा करता है कि घटना कितनी तेजी से हुई होगी.
रासुवागढ़ी इलाके में लगे सुरक्षा कैमरों के फुटेज में भी बाढ़ की भयावह तस्वीर सामने आई है. वीडियो में पानी और चट्टानों का एक विशाल सैलाब इमारतों की ओर बढ़ता दिखाई देता है. तेज बहाव के सामने वहां मौजूद कई निर्माण टिक नहीं सके.
नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने भी घटना को लेकर जानकारी दी है. उसके मुताबिक, भूस्खलन के बाद पानी का बहाव तेजी से त्रिशूली नदी बेसिन की दिशा में बढ़ा. इस अचानक आई बाढ़ ने रासुवागढ़ी क्रॉसिंग के आसपास काफी नुकसान पहुंचाया.
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी है. सेना और पुलिस की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश लगातार जारी है.
रासुवागढ़ी की यह घटना हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते प्राकृतिक खतरों की एक और गंभीर मिसाल है. नेपाल-चीन सीमा का यह इलाका पहले से ही भूकंप और भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है.
इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय के ग्लेशियरों में तेजी से बदलाव हो रहा है. ग्लेशियरों के पिघलने और पहाड़ी झीलों में पानी बढ़ने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी अचानक आने वाली ग्लेशियल बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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