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‘हुकूमत इस्लामी हो…’, बांग्लादेश में शरिया लागू कराने में जुटे कट्टरपंथी, महिलाओं पर थोप रहे पाबंदियां; दहशत में हिंदू

Bangladesh News: 1947 तक भारत का ही हिस्‍सा रहा बांग्‍लादेश अब अस्थिरता से जूझ रहा है. वहां अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था, और वे वहां से जान बचाकर भारत आ गई थीं. हसीना को वहां से भगाने वाले इस्‍लामिक कट्टरपंथी अब अपने मंसूबे पूरे करने में जुट गए हैं.

हसीना के ढाका छोड़ने के बाद बांग्‍लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी, जिसके तहत कट्टरपंथियों की गतिविधियों पर कुछ रोक लगाई गई थीं, लेकिन अब वे ताकतें वहां फिर से सक्रिय हो गई हैं.

महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर खतरा

ढाका और अन्य शहरों में कट्टरपंथी समूहों ने महिलाओं के खिलाफ नए नियम लागू किए हैं. एक शहर में घोषणा की गई है कि अब युवा महिलाएं फुटबॉल नहीं खेल सकतीं. वहीं, एक अन्य शहर में पुलिस को एक व्यक्ति को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, जिसने सार्वजनिक रूप से महिला को परेशान किया था, फिर उसे फूलों की माला पहनाई.

ढाका में इस्लामी सरकार के लिए प्रदर्शन

बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका में कट्टरपंथी प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार इस्लाम का अपमान करने वाले किसी भी व्यक्ति को मौत की सजा नहीं देती है, तो वे स्वयं यह कदम उठाएंगे.

 

संविधान में शरिया घुसाने पर दे रहे जोर

नए संविधान के मसौदे पर काम कर रहे राजनीतिक दलों के अधिकारियों ने कहा कि इसमें धर्मनिरपेक्षता को समाप्त कर बहुलवाद को प्राथमिकता दी जाएगी. बता दें कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में महिलाओं का महत्वपूर्ण स्थान रहा है, लेकिन अब कट्टरपंथी ताकतों के सत्ता में आने से महिलाओं के अधिकारों पर खतरा बढ़ गया है.

अहमदिया मुस्लिम संप्रदाय पर हमले बढ़े

हसीना सरकार के गिरने के बाद बांग्‍लादेश में अहमदिया मुस्लिम संप्रदाय के धार्मिक स्थलों पर भीड़ ने हमले किए. इसके चलते अहमदिया समुदाय डर में जी रहा है और उनकी प्रार्थना सभाओं में उपस्थिति आधी हो गई है.

शेख तस्नीम अफरोज एमी जैसी छात्राएं, जिन्होंने हसीना को सत्ता से हटाने के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी, अब ठगी हुई महसूस कर रही हैं. उन्हें उम्मीद थी कि लोकतंत्र बहाल होगा, लेकिन कट्टरपंथी ताकतों के उभरने से वे चिंतित हैं.

यह भी पढ़िए: Bangladesh में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार तुरंत होना चाहिए बंद, चिन्मय दास को किया जाए रिहा: RSS

Bharat Express Desk

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