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स्पेन में 60 हजार अवैध प्रवासियों का उत्पात! संकट देख एकजुट हुए 22 यूरोपीय देश, बुलाई इमरजेंसी मीटिंग

Spain Illegal Migrant Crisis: यूरोपीय देश स्पेन इस समय एक त्रासदी से गुजर रहा है. जहां कुछ दिनों पहले मोरक्को से 50 हजार की संख्या में अवैध प्रवासी घुस आए और जमकर उत्पात मचाया. स्पेन के इस संकट को लेकर अब यूरोपीय देश साथ आ गए हैं. 22 देशों के नेताओं ने स्पेन को लिखे पत्र में आपातकालीन बातचीत की मांग की है. इस बातचीत की पहल इटली और डेनमार्क ने की है. जिसमें मांग की गई है कि यूरोपीय सदस्य देशों के गृहमंत्री तत्काल एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ें और इस मामले पर बातचीत करें.

स्पेन का कहना है कि अवैध रूप से सीमा पार कर आए ज्यादातर लोगों को वापस मोरक्को भेज दिया गया है. इसके बावजूद यूरोपीय संघ के कई सदस्य देश इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने प्रवासी संकट से निपटने के तरीके को लेकर कुछ यूरोपीय देशों के रवैये पर सवाल उठाए थे. इसके बाद 22 देशों के नेताओं ने स्पेन को पत्र लिखकर तत्काल बातचीत की मांग की है.

इटली और डेनमार्क की पहल पर तैयार इस पत्र में यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंस बुलाने को कहा गया है. पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले देशों का कहना है कि मामला बेहद गंभीर है और इस पर तुरंत साझा रणनीति बनाने की जरूरत है.

स्पेन के मुताबिक गुरुवार को मोरक्को से करीब 60 हजार प्रवासी सेउटा में दाखिल हुए थे. इनमें से लगभग सभी लोगों को वापस भेज दिया गया है. हालांकि यूरोपीय देशों का मानना है कि सिर्फ लोगों को वापस भेज देना इस संकट का स्थायी समाधान नहीं है.

तीन देशों ने नहीं किए हस्ताक्षर

यूरो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो और लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रिडेन ने इस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए.

यह पत्र यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन को भेजा गया है. आयरलैंड ने जुलाई में यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता संभाली थी. तीन बड़े नेताओं के पत्र से दूरी बनाने के बाद यह भी साफ हो गया है कि प्रवासी संकट को लेकर यूरोपीय देशों के बीच पूरी तरह एक राय नहीं है.

यूरोप में अवैध प्रवेश का संदेश नहीं जाना चाहिए

पत्र लिखने वाले नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित बैठक में सेउटा के हालात का मिलकर आकलन किया जाना चाहिए. साथ ही यह तय होना चाहिए कि यूरोपीय यूनियन इस संकट का मिलकर किस तरह जवाब देगा.

इन देशों ने चेतावनी दी कि बड़ी संख्या में लोगों का बिना रोक-टोक यूरोप में प्रवेश करना गंभीर सुरक्षा चुनौती बन सकता है. उनका कहना है कि प्रवासियों के दबाव या दूसरे तथाकथित हाइब्रिड खतरों के कारण ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए कि यूरोपीय संघ में अवैध तरीके से दाखिल होना आसान है.

ये भी पढ़ें- 84 हजार के आबादी वाले शहर में घुस आए 60 हजार अवैध प्रवासी, स्पेन के स्यूटा में मचा हाहाकार, 67 की मौत

पत्र में यह भी कहा गया कि जरूरत पड़ने पर सदस्य देश अपनी आंतरिक सीमाओं पर नियंत्रण अस्थायी रूप से कड़ा कर सकते हैं. कुछ देशों में सीमा जांच को दोबारा लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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