Iran attack on Indian Tankers: होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में तनाव के बीच भारतीय तेल टैंकरों पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गोलीबारी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर संकट खड़ा कर दिया है. शनिवार को हुई इस हिंसक घटना के बाद भारतीय ध्वज वाले जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा.
हालांकि, भारी खतरे के बावजूद ‘देश गरिमा’ नामक टैंकर इस मार्ग को पार करने में सफल रहा जबकि चार अन्य बड़े जहाजों को सुरक्षा कारणों से वापस लौटना पड़ा. भारत ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया है.
जहाजों के निगरानी आंकड़ों (Marine Traffic) के मुताबिक, भारतीय नौवाहन निगम (SCI) का तेल टैंकर ‘देश गरिमा’ शनिवार को सफलतापूर्वक होर्मुज जलमार्ग को पार कर ओमान की खाड़ी में प्रवेश कर गया. मार्च के बाद से इस खतरनाक मार्ग को पार करने वाला यह 10वां भारतीय जहाज है.
दूसरी ओर, सनमार हेराल्ड, देश वैभव, देश विभोर और मालवाहक पोत जग अर्नव ने गोलीबारी के बाद अपनी दिशा बदल ली. जिसके चलते वर्तमान में फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों की कुल संख्या 14 हो गई है.
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, ओमान के उत्तर-पूर्व में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) की दो नौकाओं ने भारतीय टैंकरों को निशाना बनाकर गोलीबारी की. इस हमले के बाद हड़कंप मच गया और इराकी कच्चे तेल से लदे सुपरटैंकरों को अपनी यात्रा बीच में ही छोड़कर वापस मुड़ना पड़ा. बता दें कि अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे तनाव के कारण ईरान ने इस मार्ग पर वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं.
भारतीय जहाजों पर हुई गोलीबारी को भारत ने बेहद गंभीरता से लिया है. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरान के राजदूत मोहम्मद फताअली को तलब कर अपनी गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि व्यापारिक जहाजों पर इस तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है. भारत ने मांग की है कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत आने वाले तेल टैंकरों और अन्य जहाजों के सुरक्षित आवागमन को तत्काल बहाल किया जाए.
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है, जिसके विरोध में उसने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है. करीब छह हफ्ते पहले शुरू हुए अमेरिका-इजराइल और ईरान के संघर्ष के बाद से ही इस जलमार्ग पर आवाजाही ठप पड़ी है. चूंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के लिए इसी रास्ते पर निर्भर है, इसलिए इस तनाव (Strait of Hormuz Crisis) के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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